UP Panchayat Election: यूपी पंचायत चुनाव में ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाने पर अपील की तैयारी में सरकार, क्या 13 जुलाई को होगा बड़ा फैसला
लखनऊः उत्तर प्रदेश सरकार ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने पर इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा दिए गए आदेश के खिलाफ अपील दायर करने की तैयारी कर रही है। सरकार इस मामले को डबल बेंच या फुल बेंच में ले जाने की योजना बना रही है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट की जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की एकल पीठ ने 25 जून के अपने आदेश में स्पष्ट किया था कि असंवैधानिक हो चुके नियमों के आधार पर ग्राम प्रधानों को प्रशासक की भूमिका में नहीं रखा जा सकता। साथ ही अदालत ने सरकार को 13 जुलाई तक पंचायत चुनाव की रूपरेखा पेश करने का निर्देश भी दिया है।
कोर्ट ने अपने आदेश में संविधान के अनुच्छेद 243 (E) और 243 (K) का हवाला देते हुए कहा कि पंचायतों का कार्यकाल किसी भी स्थिति में पांच वर्ष से अधिक नहीं बढ़ाया जा सकता।
वहीं राज्य सरकार के उच्च पदस्थ सूत्रों का कहना है कि उत्तर प्रदेश पंचायतीराज अधिनियम 1947 की धारा 12 की उपधारा (3-A) में ऐसी परिस्थितियों का प्रावधान मौजूद है, जिसमें अपरिहार्य कारणों या जनहित में चुनाव न हो पाने की स्थिति में वैकल्पिक प्रशासनिक व्यवस्था के तहत प्रशासक या समिति नियुक्त की जा सकती है। यह संशोधन अप्रैल 1994 में लागू हुआ था।
हालांकि कोर्ट पहले भी प्रेम लाल पटेल बनाम उत्तर प्रदेश राज्य मामले में यह स्पष्ट कर चुका है कि इस प्रावधान का उपयोग चुनावों को अनिश्चितकाल तक टालने या कार्यकाल बढ़ाने के लिए नहीं किया जा सकता, क्योंकि यह असंवैधानिक होगा।
न्यायालय ने यह भी कहा था कि पंचायत चुनाव कराना राज्य निर्वाचन आयोग का संवैधानिक अधिकार है और सरकार प्रशासनिक कारणों का हवाला देकर इसमें देरी नहीं कर सकती।
जानकारों के अनुसार धारा 12(3-A) अभी भी कानून में मौजूद है, जिसके आधार पर राज्य सरकार अपनी दलील मजबूत मान रही है। इसी के चलते सरकार अब एकल पीठ के आदेश को चुनौती देने की तैयारी कर रही है।
इस मामले में अपील दायर करने की पुष्टि उत्तर प्रदेश राज्य स्थानीय ग्रामीण निकाय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष और सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस राम औतार सिंह ने भी की है।
सरकार आयोग को पक्षकार बनाए जाने के आदेश को भी चुनौती देगी। जस्टिस राम औतार सिंह का कहना है कि कमीशन ऑफ इन्क्वायरी एक्ट की धारा-9 के तहत आयोग को किसी मुकदमे में पक्षकार नहीं बनाया जा सकता।
ओबीसी आरक्षण आयोग की प्रगति रिपोर्ट
राज्य सरकार ने पंचायत चुनावों में ओबीसी आरक्षण निर्धारण के लिए 18 मई को समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन किया था, जो सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत काम कर रहा है।
आयोग का उद्देश्य राज्य में अन्य पिछड़ा वर्ग की जनसंख्या, सामाजिक-आर्थिक स्थिति और पिछड़ेपन का विस्तृत अध्ययन करना है। आयोग के अनुसार, सभी 75 जिलों के डीएम से आंकड़े एकत्र किए जा चुके हैं।
आयोग ने अब तक मेरठ, हापुड़ और बागपत जिलों का दौरा भी किया है। अब ब्लॉक और गांव स्तर पर आंकड़ों का सत्यापन किया जा रहा है।
आयोग के अध्यक्ष के अनुसार, सभी जिलों का दौरा पूरा करने में लगभग 6 महीने लगेंगे और अंतिम रिपोर्ट नवंबर तक सरकार को सौंपी जा सकती है।
