लखनऊ कोचिंग अग्निकांड: बिना फायर एनओसी और मानकों के चल रहे व्यावसायिक भवन, नहीं हैं जान बचाने के इंतजाम

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Published By Anjali Singh
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- बेसमेंट में खुले शिक्षण संस्थान, गलियों में होटल, नर्सिंगहोम, अपार्टमेंट व कॉम्पलेक्स - एलडीए ने जुलाई 2024 में 107 संस्थानों जांच कर की थी कार्रवाई -लेकिन सुधार धरातल पर दिख नहीं रहा -घने बाजारों में ताने जाते कांप्लेक्स

लखनऊ, अमृत विचार : शहर में लाखों की आबादी के बीच गलियों और सड़कों में अपार्टमेंट, होटल, नर्सिंगहोम, शिक्षण संस्थान, कॉम्पलेक्स आदि भवन सुरक्षित नहीं है। चाहे आग लगे या फिर बिल्डिंग गिरे घटना के समय जिम्मेदारों पर सवाल खड़े हो जाते हैं। ऐसे भवनों में न आग बुझाने के इंतजाम न ही भागने के। घटना के समय अभियान चलता है और कार्रवाई सीलिंग व नोटिस में सिमट कर खत्म हो जाती है। शायद इसी वजह से मानकों को दरकिनार करके इमारतें तनती जा रहीं है, सोमवार को अलीगंज में हुई आग की घटना ने फिर जिम्मेदारों पर सवाल खड़े कर दिए। जहां छात्रों व अन्य लोगों ने कूदकर और तार के सहारे नीचे उतरकर जान बचाई।

बाजारों का हाल और खराब

और तो और शहर के घने बाजारों का हाल और खराब है। गलियों में कई मंजिलें कांप्लेक्स हैं... और भी बन रहे हैं। यहियागंज, नादान महल समेत कई इलाकों में गलियों में कारोबार हो रहा है। हाल यह है कि यहियागंज क्षेत्र की तंग और संकरी गलियों में एक तिपहिया वाहन तक निकलना मुश्किल है। दमकल गाड़ी तक पहुंचना मुश्किल है लेकिन कांप्लेक्स बनाए जा रहे हैं। जिम्मेदारों के नाक के नीचे बहुमंजिला बाजार लगातार बढ़ता जा रहा है। बेसमेंट तक मानक के विरुद्ध हैं।

बिना मानक के आवासीय और व्यवसायिक भवन

शहर में ज्यादातर आवासीय व व्यवसायिक भवन बिना मानक हैं। आवासीय में नर्सिंगहोम, होटल, शिक्षण संस्थान, दुकान आदि कारोबार होते हैं। एलडीए से मानचित्र स्वीकृत नहीं है। जो स्वीकृत है तो निर्माण विपरीत कर रखा है। बिल्डर हो या भवन स्वामी न सेटबैक छोड़ा न पार्किंग न ही आग से बचाव के इंतजाम कर रखे हैं। पूर्व की घटनाओं पर भी जिम्मेदार नहीं चेते हैं। आयेदिन अवैध निर्माण सील व ध्वस्तीकरण का असर नहीं है। एलडीए ने वर्ष 2024 में दिल्ली के एक कोचिंग सेंटर में हादसे का संज्ञान लेकर 107 शिक्षण संस्थान चिह्नित करके सील व नोटिस चस्पा किए थे। इनमें ज्यादातर कोचिंग, लाइब्रेरी व इंस्ट्टियूट अलीगंज क्षेत्र में बेसमेंट व बिना मानक भवनों में मिले थे। मई 2026 में दिल्ली के मालवीय नगर के एक होटल में आग की घटना को लेकर अभियान चलाया गया। इस दौरान ज्यादातर होटलों में आग से बचाव के पर्याप्त इंतजाम नहीं मिले। गेस्ट हाउस, बैंक्वेट हाल व लॉन के मानचित्र तक नहीं मिले थे।

मानचित्र तो स्वीकृत लेकिन नियमों का पालन नहीं

कार्रवाई से बचने के लिए बिल्डर या फिर भवन स्वामी आवासीय व व्यवसायिक भवनों का एलडीए से मानचित्र स्वीकृत कराता है तो नियमों के तहत निर्माण नहीं कराते हैं। भवन में सेटबैग तक नहीं छोड़ते हैं न ही पार्किंग बनाते हैं। बेसमेंट को भी आवासीय व व्यवसायिक गतिविधियों में इस्तेमाल करते हैं। वर्ष 2025 में नए बिल्डिंग बायलॉज में छूट मिली तो और हौसले बुलंद हो गए। नये बायलॉज में जो नियम दिए गए उसका पालन नहीं हो रहा है। इसका फायदा उठाकर सकरी गलियों में व्यवसायिक भवन बनते जा रहे हैं और पुरानों पर कार्रवाई नहीं होती है।

2016 में घरेलू से कमर्शियल हुआ था कनेक्शन

पुरनिया के सेक्टर-डी स्थित ऐनिमेशन सेंटर में सोमवार दोपहर लगी आग के बाद लेसा की कार्यप्रणाली और कनेक्शन जारी करने की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आग की घटना के बाद चर्चा यह कि उस सेंटर को बिजली कनेक्शन देते समय विभाग की ओर से एनओसी समेत सभी जरूरी नियमों और मानकों का पालन किया गया था या नहीं। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, संबंधित बिजली कनेक्शन वर्ष 2012 से पहले का है और शुरुआत में यह घरेलू श्रेणी का कनेक्शन था। बाद में वर्ष 2016 के बाद इसे घरेलू से व्यावसायिक (कॉमर्शियल) श्रेणी में परिवर्तित किया गया था। 

हालांकि, विभाग के जिम्मेदार अधिकारी यह साफ रूप से नहीं बता पा रहे हैं कि कनेक्शन जारी करने और श्रेणी परिवर्तन के दौरान आवश्यक एनओसी और अन्य औपचारिकताएं पूरी की गई थीं या नहीं। इससे विभागीय रिकॉर्ड और निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। ट्रांसगोमती के मुख्य अभियंता वीपी सिंह ने बताया कि आग लगने के कारणों की जांच की जा रही है। 

 एनओसी के दावों पर लेसा के पास नहीं कोई जवाब

उन्होंने कहा कि विभाग के पास फिलहाल ऐसे कोई पुख्ता दस्तावेज अभी उपलब्ध नहीं हैं, जिनके आधार पर यह निश्चित तौर पर कहा जा सके कि एनओसी सहित सभी नियमों का पालन किया गया था या नहीं। हालांकि, उनका मानना है कि घरेलू से व्यावसायिक कनेक्शन में परिवर्तन के समय आवश्यक एनओसी विभाग की ओर से जरूर ली गई होगी। मुख्य अभियंता के अनुसार, पूरे मामले की विस्तृत जांच कराई जा रही है और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। आग की घटना के बाद सेंटर की विद्युत सुरक्षा व्यवस्था और विभागीय प्रक्रियाओं की भी समीक्षा किए जाने की संभावना है।

 

 

इन वर्षों में हुई ये मुख्य घटनाएं

वर्ष 2019 में चारबाग में होटल विराट और एसएसजी में अग्निकांड

वर्ष 2022 में हजरतगंज क्षेत्र में होटल लेवाना में आग

वर्ष 2023 में हजरतगंज क्षेत्र में अलावा अपार्टमेंट गिरा

वर्ष 2024 में ट्रांसपोर्ट नगर में तीन मंजिला बिल्डिंग गिरी

वर्ष 2025 में चारबाग क्षेत्र में होटल मोहन में आग लगी

ऊंची इमारतों में इन मानकों का नहीं होता पालन

- मानचित्र के अनुसार भवन का निर्माण

- रेन वाटर सिस्टर व पार्किंग की जगह

- हाइट के हिसाब से फायर गाड़ी जाने को सेटबैक

- फायर के प्वाइंट, स्मोक फायर अलार्म

- परिसर में आग बुझाने के हाईड्रेंट प्वाइंट

- निकास द्वार, जीना, फायर स्टेयरकेस

- फायर व ज्वलनशील पदार्थ रखने की एनओसी

- आग बुझाने के लिए अग्निशमन यंत्र व समय उसकी रीफिलिंग

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