रजनीकांत और कमल हासन ने 'Dharman' के लिए क्यों बदले 4 डायरेक्टर्स? थलाइवा ने खुद किया खुलासा
दिल्ली। फिल्म इंडस्ट्री में अक्सर किसी प्रोजेक्ट के निर्देशकों (Directors) का बार-बार बदलना एक 'रेड फ्लैग' या नकारात्मक संकेत माना जाता है। अमूमन लोग इसे क्रिएटिव मतभेद, बजट की गड़बड़ी या स्क्रिप्ट के कमजोर होने से जोड़कर देखते हैं। लेकिन, जब किसी प्रोजेक्ट के पीछे खुद 'उलगानायगन' कमल हासन (निर्माता) और स्क्रीन पर थलाइवा रजनीकांत हों, तो सिनेमा के आम नियम वहां लागू नहीं होते।
बुधवार को जब इस मेगा प्रोजेक्ट के नाम 'Dharman' (धर्मन) का आधिकारिक एलान हुआ, तो सुपरस्टार रजनीकांत ने खुद एक बेहद दिलचस्प खुलासा किया। उन्होंने बताया कि 'ओ माई कडावुले' फेम के युवा निर्देशक अश्वथ मारिमुथु को फाइनल करने से पहले यह फिल्म के.एस. रविकumar, सुंदर सी. और सीबी चक्रवर्ती जैसे दिग्गजों के हाथों से होकर गुजरी।
इस बदलाव को यदि गहराई से समझा जाए, तो यह फिल्म के संकट में होने का संकेत नहीं है, बल्कि यह इस बात का सबूत है कि आज के दौर में ये दोनों महानायक अपनी लेगेसी (विरासत) और बॉक्स ऑफिस को लेकर कितने गंभीर और रणनीतिक हो चुके हैं।
क्यों टलते गए पिछले डायरेक्टर्स?
सुपरस्टार रजनीकांत ने मीडिया के सामने पूरी पारदर्शिता के साथ इस टाइमलाइन को साझा किया, जिससे साफ होता है कि हर फैसला बेहद सोच-समझकर लिया गया था। शुरुआत में सबसे पहले इस फिल्म के लिए अनुभवी कमर्शियल डायरेक्टर के.एस. रविकुमार के साथ बातचीत हुई, लेकिन बात आगे नहीं बढ़ सकी। इसके बाद सुंदर सी. को फाइनल किया गया, लेकिन उनके पिछले प्रोजेक्ट्स में देरी के कारण उन्होंने खुद ही इस फिल्म से पीछे हटने का फैसला किया। सबसे बड़ा और अहम मोड़ आया सीबी चक्रवर्ती के साथ। सीबी ने एक बेहद महत्वाकांक्षी कहानी पिच की थी, जो एक न्यूक्लियर साइंटिस्ट और परमाणु हथियारों के इर्द-गिर्द घूमती थी। इस फिल्म की शूटिंग रूस और अफगानिस्तान जैसे भू-राजनीतिक (Geopolitical) रूप से संवेदनशील और जटिल इलाकों में होनी थी।
रजनीकांत ने स्क्रिप्ट की तारीफ तो की, लेकिन माना कि इस तरह के इंटरनेशनल थ्रिलर को धरातल पर उतारने में बहुत अधिक समय लगता। रजनीकांत इस समय 'जेलर 2' और कमल हासन के साथ एक और ऑन-स्क्रीन रीयूनियन फिल्म (जिसका निर्देशन नेल्सन कर रहे हैं) जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहे हैं। 70 के दशक के मध्य में पहुंच चुके थलाइवा के लिए समय सबसे कीमती है, और वह किसी एक फिल्म के लिए सालों का इंतजार नहीं कर सकते थे।
लोकेश कनकराज की 'विक्रम' (कमल हासन के लिए) और नेल्सन की 'जेलर' (रजनीकांत के लिए) इसका सबसे बड़ा उदाहरण हैं। ये युवा निर्देशक खुद इन स्टार्स के बहुत बड़े प्रशंसक रहे हैं। इन्हें अच्छी तरह पता है कि रजनीकांत के विंटेज स्वैग को आज की 'जेन-जी' (Gen-Z) और मिलेनियल्स जनरेशन के सामने किस तरह नए और स्टाइलिश अंदाज में परोसना है।
'Dharman' का फर्स्ट लुक पोस्टर भी इस बात की गवाही देता है। पोस्टर में रजनीकांत एक 'डेडली डॉक्टर' के रूप में मेडिकल स्क्रब पहने, हाथ में खून से सना सर्जिकल ब्लेड (Scalpel) लिए ऑपरेशन थिएटर में खड़े हैं, और उनके पैरों के पास सिली हुई लाशें नजर आ रही हैं। तमिल में इसका कैप्शन है— 'धर्ममे वेलुम' (न्याय की ही जीत होगी)। यह साफ करता है कि यह कोई घिसी-पिटी मसाला फिल्म नहीं, बल्कि एक डार्क और हाई-कांसेप्ट साइकोलॉजिकल थ्रिलर होने वाली है।
'हर कीमत पर जीतना है'
आज के समय में जब सोशल मीडिया पर बॉक्स ऑफिस नंबर्स का विश्लेषण बेहद बेरहमी से होता है और दर्शकों के पास धैर्य की कमी है, वहां स्टार्स पर सफलता का दबाव बहुत ज्यादा है। रजनीकांत की हालिया फिल्म 'कूली' (Coolie) ने हालांकि अच्छी कमाई की, लेकिन क्रिटिक्स और दर्शकों से इसे मिली-जुली (Lukewarm) प्रतिक्रिया मिली थी।
'Dharman' के लिए तीन बार निर्देशक बदलकर चौथे पर मुहर लगाना यह साबित करता है कि ये दोनों दिग्गज जल्दबाजी में कोई समझौता नहीं करना चाहते थे। अश्वथ मारिमुथु जैसे भूखे और विजनरी युवा निर्देशक को कमान सौंपकर, उन्होंने इस उथल-पुथल भरे प्री-प्रोडक्शन फेज को एक ऐतिहासिक ब्लॉकबस्टर की नींव में बदल दिया है।
