राममंदिर चढ़ावा चोरी मामला : आरोपियों की मेडिकल रिपोर्ट ने चौकाया, न ब्लड प्रेशर बढ़ा, न चेहरे पर तनाव! जानिए जेल में कैसे गुजरी पहली रात
पुनीत श्रीवास्तव, अयोध्या, अमृत विचार। राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी के बहुचर्चित मामले को लेकर भले ही लोगों की उत्सुकता उत्कंठा चरम पर हो, लेकिन पहले चरण में एसआईटी की रिपोर्ट के बाद दर्ज एफआईआर पर गिरफ्तार किए गए आठों आरोपियों की मेडिकल जांच रिपोर्ट बड़ी चौंकाने वाली रही। न्यायिक मजिस्ट्रेट के यहां शुक्रवार को पेशी से पहले पुलिस लाइंस में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच चिकित्सकों के पैनल द्वारा की गई सभी की मेडिकल जांच रिपोर्ट में सबकुछ सामान्य आया है।
सूत्रों की मानें तो राम मंदिर के चढ़ावे में हेराफेरी और चोरी के इन आठ आरोपियों का न तो ब्लड प्रेशर बढ़ा हुआ मिला और न ही दिल की धड़कन। सभी आठ आरोपी सामान्य स्वस्थ्य व्यक्ति की तरह जांच रिपोर्ट में पाए गए हैं। सूत्र बताते हैं कि आठों के माथे पर किसी तरह की कोई शिकन और चेहरों पर किसी तरह की कोई परेशानी और तनाव नहीं दिखा।
राम मंदिर में चढ़ावा कांड के आरोपियों का मेडिकल कराने के लिए शुक्रवार को पुलिस को काफी जद्दोजहद करनी पड़ी। हर जगह मीडिया की मौजूदगी रही। कभी जिला अस्पताल तो कभी श्रीराम चिकित्सालय में मेडिकल कराने का निर्णय लिया जाता रहा, लेकिन मीडिया कर्मी लगातार उन पर नजर बनाए हुए थे। इस बीच जिला अस्पताल से ही मेडिकल टीम का पैनल का चयनित किया गया।
सूत्रों की मानें तो यहां मीडिया की नजरों से मेडिकल टीम को बचाने के लिए चिकित्सालय के वाहन का इस्तेमाल न करते हुए पुलिस के एक निजी वाहन का उपयोग किया गया। दोपहर में एक बजे के करीब जिला चिकित्सालय से मेडिकल टीम का पैनल पुलिस लाइन पहुंचा। यहां एसओजी स्टाफ के सामने मेडिकल टीम ने जांच करने का काम शुरू किया। सभी संसाधनों से लैस होकर पहुंची टीम ने 20 वर्ष से लेकर 70 वर्ष तक की आयु तक के आरोपियों का चेकअप किया। ब्लड प्रेशर, शुगर, पल्स रेट इत्यादि देखा गया। इस दौरान सभी की रिपोर्ट सामान्य बताई गई।
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. राजेश सिंह बताते हैं कि मेडिकल चेकअप में यह देखा जाता है कि कहीं किसी आरोपी के शरीर पर पहले से चोट के निशान तो नहीं हैं। बिना यह सब देखे आरोपी को हिरासत में भेज दिया जाएगा तो यह भी हो सकता है कि वे पहले की चोट को ताजी चोट बताते हुए मारपीट का आरोप लगा सकते हैं। बाकी ब्लड प्रेशर, शुगर व पल्स इत्यादि चेक की जाती है। इसके बाद रिपोर्ट पुलिस विभाग को सौंपी जाती है।
सबसे पहले अनुकल्प का हुआ था मेडिकल
पुलिस लाइन के एसओजी कक्ष में मेडिकल टीम ने सबसे पहले आरोपी अनुकल्प मिश्रा का मेडिकल किया। इसके बाद लवकुश मिश्रा का नंबर आया था। फिर एक-एक कर बाकी आरोपी करुणेश पांडेय, मनीष यादव, अविनाश शुक्ला, रमाशंकर मिश्र, ट्रस्ट महासचिव चंपत राय के ड्राइवर रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू व गणना प्रभारी रहे सुभाष श्रीवास्तव का मेडिकल किया गया। दोपहर साढ़े तीन बजे मेडिकल टीम का पैनल मेडिकल कर चिकित्सालय लौटा। उधर, रिमांड आदेश मिलने के बाद सभी आरोपियों को जिला कारागार भेज दिया गया।
कहीं ये साइकोपैथिक पर्सनालिटी डिसऑर्डर तो नहीं
अमूमन देखा जाता है कि पुलिस का नाम आते ही अच्छे-अच्छों के पसीने छूट जाते हैं, लेकिन राम मंदिर चढ़ावा चोरी कांड में आठों आरोपियों के चेहरे पर शिकन न होने और स्वास्थ्य चेकअप सामान्य होना भी बड़ा सवाल है। इस संबंध में जिला अस्पताल के मनोपरामर्शदाता डॉ. आलोक मनदर्शन ने अपनी राय देते हुए ऐसे लोगों को तीन कैटेगिरी में बांटा है। उन्होंने सबसे पहले साइकोपैथिक पर्सनालिटी डिसऑर्डर के बारे में बताया।
कहा इस कैटेगिरी के लोग गलत काम करने से नहीं डरते और न ही उन्हें गिरफ्तार होने का भय रहता है। एकदम कॉमन रहते हैं। बड़े अपराधियों में साइकोपैथिक पर्सनालिटी डिसऑर्डर दिख जाता है। मैच्योर पर्सनालिटी वाले लोग अच्छे और मानसिक रूप से बेहद मजबूत हाेते हैं। ऐसे लोग परेशानियों से लड़ते हैं। मान लीजिए किसी केस में फंस जाते हैं तो अपने आप को साबित कर लेने तक शांति बनाए रखते हैं। चूंकि वह जानते हैं कि कानून से उन्हें न्याय जरूर मिलेगा। वहीं इन मैच्योर पर्सनालिटी वाले लोग हर सजा को मजाक में लेते हैं। वह कुछ भी नहीं सोचते, लेकिन ऐसी पर्सनालिटी के लोग कम मिलते हैं।
