राम मंदिर चढ़ावा मामला : CM योगी के सख्त रुख का असर, चंपत राय और अनिल मिश्रा का इस्तीफा, गोपाल राव भी हटाए गए

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Published By Deepak Mishra
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एसआईटी रिपोर्ट के बाद जांच का दायरा बढ़ने के संकेत, तीनों की भूमिका पर पुलिस और एसआईटी का फोकस

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सख्त रुख और एसआईटी जांच के बाद चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा के इस्तीफे की आधिकारिक पुष्टि हुई। निर्माण सहायक गोपाल राव को भी दायित्व से मुक्त किया गया।

लखनऊ/अयोध्या, अमृत विचार: राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सख्त रुख और एसआईटी जांच के बाद आखिरकार शनिवार को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंददेव गिरि ने महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा के त्यागपत्र प्राप्त होने की आधिकारिक पुष्टि कर दी। गोपाल राव को भी बाहर कर दिया गया है। मुख्यमंत्री योगी के कड़े रुख से अब राम मंदिर चढ़ावा लूट में तीनों की भूमिका को कानूनी कार्रवाई के दायरे में लाया जाएगा।

सूत्रों के मुताबिक बदले घटनाक्रम को लेकर ट्रस्ट अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास के निर्देश पर ट्रस्ट सदस्यों को बैठक का नियमानुसार 15 दिन बाद 11 जुलाई को बैठक का एजेंडा भेज दिया गया है। बैठक में त्यागपत्रों पर अंतिम निर्णय और आगे की प्रशासनिक व्यवस्था (एसओपी) पर चर्चा होगी।

एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट में चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा की प्रशासनिक जवाबदेही पर उठाए गए गंभीर सवाल भी चर्चा के एजेंडे में हैं। चढ़ावे की सुरक्षा, गिनती और बैंक में जमा कराने की व्यवस्था उनके प्रशासनिक दायित्व के अंतर्गत थी। जांच में 27 अप्रैल से 6 जून तक की सीसीटीवी फुटेज में 72 अलग-अलग मौकों पर चढ़ावे की गिनती के दौरान अनियमितताओं का उल्लेख किया गया है।

बैठक में पूरी रिपोर्ट रखी जाएगी, जिसमें सबसे अहम तथ्य 4 जून को चंपत राय को कथित चोरी की जानकारी के बाद चुप्पी साधना है। हालांकि इसके बाद सीसीटीवी फुटेज देखी गई, आरोपित कर्मचारियों की पहचान हुई और पुलिस की मदद से उनके घरों से नकदी बरामद भी हुई, लेकिन तत्काल एफआईआर दर्ज नहीं कराई गई। एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि पुलिस ने मुकदमा दर्ज कराने का आग्रह किया था, लेकिन उस समय ट्रस्ट की ओर से तहरीर नहीं दी गई।

इसी आधार पर रिपोर्ट में संबंधित जिम्मेदार पदाधिकारियों को तत्काल क्लीन चिट देने से इन्कार करते हुए उनकी भूमिका की विस्तृत जांच की संस्तुति की गई है। सूत्रों का कहना है कि एफआईआर में नामजद आरोपियों से पूछताछ और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ रही है। यदि जांच में पर्याप्त साक्ष्य सामने आते हैं तो कानून के अनुसार अन्य जिम्मेदार व्यक्तियों की भूमिका भी जांच के दायरे में लाई जा सकती है।

''ये बादल छंटेंगे, अंधेरा हटेगा'' : स्वामी गोविंददेव गिरि

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंददेव गिरि ने कहा कि राम मंदिर में हाल के दिनों में हुई घटनाओं से ट्रस्ट स्तब्ध, आहत और दुखी है। ट्रस्ट निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कठोर वैधानिक कार्रवाई के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने श्रद्धालुओं को भरोसा दिलाया कि भगवान श्रीराम को अर्पित स्वर्ण, रजत, आभूषण और अन्य बहुमूल्य चढ़ावा सुरक्षित है।

एसआईटी की अंतरिम रिपोर्ट के आधार पर एफआईआर दर्ज हो चुकी है और विधिक कार्रवाई जारी है। स्वामी गोविंददेव गिरि ने श्रद्धालुओं से अफवाहों से दूर रहने की अपील करते हुए कहा कि "हमें विश्वास है कि ये बादल छंटेंगे, अंधेरा हटेगा, सत्य-सूर्य का प्रकाश होगा तथा श्रीरामभक्ति की प्रबल धारा अखंड बहती रहेगी। जय श्रीराम।"

बागड़ा, परांडे और विनायक लेकर आए थे संघ का संदेश

सूत्रों के अनुसार, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के निर्देश पर विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय महामंत्री बजरंग लाल बागड़ा, केंद्रीय संगठन मंत्री मिलिंद परांडे और केंद्रीय सह संगठन महामंत्री विनायक राव 24 जून को अयोध्या पहुंचे थे। इसी बैठक में चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा के त्यागपत्र व गोपाल राव को दायित्व से मुक्त किए जाने पर सहमति बनी। अगले दिन एफआईआर दर्ज होने के बाद त्यागपत्र ट्रस्ट अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास को भेजे गए।

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