Champat Rai : रामलला के पटवारी के रूप में जाने जाते हैं चंपत राय, जानिए प्रोफेसर से ट्रस्ट के महासचिव बनने तक का सफर

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Published By Deepak Mishra
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अयोध्या, अमृत विचार। चंपत राय उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के नगीना के निवासी हैं। लोग उन्हें रामलला का पटवारी भी कहते हैं। उनका जन्म 1946 में रामेश्वर प्रसाद बंसल के परिवार में हुआ था। वह बचपन से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से प्रभावित थे और उसमें शामिल हो गए। चंपत राय ने संघ के विचारों के प्रचार-प्रसार के लिए कड़ी मेहनत की और संगठन के लिए एक प्रचारक के रूप में कार्य किया। राय ने भौतिकी का अध्ययन किया।

उन्होंने बिजनौर जिले के धामपुर स्थित आरएसएम डिग्री कॉलेज में भौतिकी के प्रोफेसर के रूप में भी कार्य किया। चंपत राय को साल 1991 में क्षेत्रीय संगठन मंत्री बनाकर अयोध्या भेजा गया। 1996 में वह विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय मंत्री बनाए गए। साल 2002 में संयुक्त महामंत्री और फिर अंतरराष्ट्रीय महामंत्री बनाए गए। उन्होंने शादी भी नहीं की।

पढ़ाई पूरी करने के बाद धामपुर के आरएसएम डिग्री कॉलेज में केमिस्ट्री के प्रोफेसर बन गए। 1975 में आपातकाल के दौरान 18 महीने जेल में रहे। जेल से छूटने के बाद उन्होंने नौकरी से इस्तीफा दे दिया और संघ के प्रचारक बन गए। वह 19 फरवरी 2020 को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव बने।

सरकारी होम्योपैथिक चिकित्सक भी रहे डॉ. अनिल मिश्र

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा अंबेडकरनगर जिले के रहने वाले हैं। वह एक सरकारी होम्योपैथिक डॉक्टर रहे हैं और गोंडा व सुल्तानपुर में होम्योपैथिक चिकित्सा अधिकारी के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। वह उत्तर प्रदेश होम्योपैथिक मेडिकल बोर्ड के रजिस्ट्रार भी रह चुके हैं। वर्तमान में लक्ष्मणपुरी कॉलोनी में रहते हैं।

ट्रस्ट में नियुक्ति से पूर्व शहर के रिकाबगंज चौराहे पर क्लीनिक चलाते थे। वह लंबे समय से संघ से जुड़े हैं और उन्होंने राम मंदिर आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लिया था। पांच फरवरी वर्ष 2020 में उन्हें ट्रस्ट का सदस्य नियुक्त किया गया था। 22 जनवरी 2024 को रामलला के प्राण प्रतिष्ठा समारोह में उन्होंने मुख्य यजमान की भूमिका निभाई।

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