मुरादाबाद: खेरखाता गांव में रहस्यमयी बुखार से तीन दिन में छह की मौत
मुरादाबाद/भगतपुर/अमृत विचार। रहस्यमयी बुखार ने गांव में मातम ला दिया है। यह गांव है खेरखाता, जहां लगभग हर परिवार में एक या दो लोग इस बुखार से पीड़ित बताए जा रहे हैं। इनमें करीब तीस लोगों का इलाज अलग-अलग अस्पतालों में भी चल रहा है। हैरत की बात तो यह है कि इस रहस्यमयी बुखार …
मुरादाबाद/भगतपुर/अमृत विचार। रहस्यमयी बुखार ने गांव में मातम ला दिया है। यह गांव है खेरखाता, जहां लगभग हर परिवार में एक या दो लोग इस बुखार से पीड़ित बताए जा रहे हैं। इनमें करीब तीस लोगों का इलाज अलग-अलग अस्पतालों में भी चल रहा है। हैरत की बात तो यह है कि इस रहस्यमयी बुखार ने तीन दिन में छह लोगों की जान ले ली है।
मरने वालों में एक किशोरी और एक महिला भी शामिल है। इससे भी चौंकाने वाली बात यह है कि जिस गांव में बीमारी तांडव मचा रही है, उस गांव की चीख पुकार स्वास्थ्य विभाग के कानों तक अब तक नहीं पहुंची है। न ही इस गांव में मलेरिया-डेंगू मच्छरों से बचाव के कोई इंतजाम किए गए। न ही इस विभाग के अधिकारियों ने यह जानने की कोशिश की कि आखिरकार कौन सा बुखार है।
भगतपुर थाना क्षेत्र में खेरखाता गांव के पास मूंढापांडे स्वास्थ्य केंद्र है। इस गांव में लोग संकट में है, इस स्वास्थ्य केंद्र के डाक्टर भी इससे अनजान हैं। रहस्यमयी बुखार पिछले 15 दिन से गांव वालों को तंग कर रहा है। यहां तक कि इस बुखार के बड़े घातक परिणाम भी सामने आ रहे हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग बेफिक्र है और नींद पूरी करने में लगा है। गांव के रहने वाले सुहेल व इंतेखाब आलम ने बताया कि खैरखाता के रहने वाले शफी (50) पुत्र बशीर अहमद, हाजरा बेगम (55) पत्नी अबरार हुसैन, नीरज (32) पुत्री लालाराम को बुखार होने पर अस्पताल में भर्ती कराया था।
शनिवार को तीनों ने दम तोड़ दिया। यही नहीं शुक्रवार को इंतजार अली (45) पुत्र जुल्फिकार अली व इम्तियाज मिस्त्री की 15 वर्षीय पुत्री और गुरुवार को बरकत अली (35) पुत्र मोहम्मद अजीज ने भी इसी तरह के बुखार के चलते दम तोड़ दिया। यही नहीं करीब 30 लोग अस्पताल में अब भी भर्ती हैं, इसमें बुजुर्ग मोहम्मद हनीफ, मोम्मद रफीक, युवक फहीम अहमद, फिरोज आलम, जहीर आलम और लालाराम की हालत ज्यादा गंभीर है।
गांव वाले बता रहे हैं कि जो बीमार हैं और जिनकी मौत हो गई है उनकी निजी लैब से कराई गई खून जांच में डेंगू और मलेरिया बताया गया, हालांकि इसकी पुष्टि अभी सरकारी चिकित्सकों ने नहीं की है। पर इस कदर हावी हो रहे बुखार से निजात दिलाने के लिए भी इन अफसरों ने अब तक कोई कदम नहीं उठाया है। न ही फॉगिंग कराई गई है और न ही यहां के लोगों के लिए सरकारी तौर पर जांच के लिए खून के सेंपल लिए गए हैं। मूंढापांडे एमओआईसी को तो इस बड़ी घटना की खबर तक नहीं है।
उदासीनता पर दिखा ग्रामीणों का आक्रोश
खेरखाता गांव में छह लोगों की मौत हो गई, करीब 30 के करीब जिंदगियां अस्पताल में जूझ रही हैं। हर घर में कोई न कोई बीमार पड़ गया है। उसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग खबर तक नहीं लेने नहीं आया तो गांव वालों का गुस्सा फूट पड़ा। ग्रामीण सड़क पर उतर आए। उन्होंने इस विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और अपना जाहिर किया। इस दौरान मोहम्मद साहिल, मोहम्मद गुलवेज, नौशाद पाशा, रेहान मोहम्मद दानिश, इंतखाब आलम शामिल थे।
बेगमपुर में जांच करने गई टीम का विरोध
डिलारी के गांव बेगमपुर में डेंगू व मलेरिया की जांच करने गई स्वास्थ्य विभाग की टीम का लोगों ने विरोध कर दिया। मलेरिया विभाग से मिली जानकारी में शुक्रवार को गई इस टीम ने जब स्लाइड (रक्त पट्टिकाएं) बनाने की बात कही तो गांव वालों ने सीधे मना कर दिया। उनका कहना था कि टीम कोविड की जांच करने आई है। इसपर उन्हें काफी समझाया गया, पर वे नहीं माने। हालांकि इस दौरान आधा दर्जन बच्चों सहित करीब 25 लोगों की स्लाइड तैयार कर ली गई। बाकी गांव वालों ने उन्हें लौटा दिया। हालांकि अभी इस स्लाइड की रिपोर्ट नहीं आई है।
कुंदरकी, कांठ, डिलारी में नहीं मिला डेंगू
जिला मलेरिया अधिकारी डा. ब्रह्म सिंह ने बताया कि कुंदरकी, कांठ और डिलारी के कुछ गांवों में फॉगिंग कराई गई है। यहां बुखार से पीड़ित कुछ लोगों की जानकारी मिली थी। जब मौके पर गए तो वहां करीब 20 लोगों की स्लाइड तैयार की गई। उसकी जांच हुई तो कोई डेंगू या मलेरिया का मरीज नहीं पाया गया।
जिला मलेरिया अधिकारी डा. ब्रह्म सिंह ने बताया कि खैरखाता गांव में बुखार से पीड़ितों की कोई जानकारी नहीं दी गई है। न ही निजी लैब, अस्पताल या फिर गांव वालों की ओर से इस तरह का कुछ बताया गया है। मूंढापांडे एमओआईसी ने भी कुछ नहीं बताया। अब जानकारी मिली है तो रविवार को ही टीम मौके पर भेजेंगे। गांव में जो भी बुखार से पीड़ित होगा, उनकी स्लाइड बनाई जाएंगी। उसके बाद उनकी जांच कराई जाएगी। फॉगिंग और एंटीलार्वा साइड भी डलवाया जाएगा।
