Unnao News: गौशाला’ में सूखा भूसा खाने को विवश ‘गोवंश’...जिम्मेदार बेखबर

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Edited By Amrit Vichar
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गौशाला’ में सूखा भूसा खाने को विवश हैं ‘गौवंश’

उन्नाव, अमृत विचार। योगी सरकार की बहुप्रचारित गौशाला योजना को मूर्त रूप से धरातल पर उतरने में  जिम्मेदार रोड़ा अटका रहे हैं। जिम्मेदार गौशालाओं में बंद गोवंशों की दयनीय दुर्दशा होने के बावजूद बेखबर हैं।   

सफीपुर विकास खंड क्षेत्र की ग्राम पंचायत खरगौरा में बेसहारा गोवंशों के लिये बनवाये गये आश्रय स्थल में इन दिनों गोवंश बदहाल स्थिति से गुजर रहे है। सरकार द्वारा बेसहारा गोवंशों के चारे पानी की व्यवस्था एवं उनके देख- रेख के लिए प्रति वर्ष लाखों रुपयों का बजट ग्राम पंचायतों को दिया जाता हैं। 

परंतु उसके बावजूद भी जिम्मेदारों की खाऊ कमाऊ नीति के चलते आश्रय स्थलों में गोवंशों को सिर्फ सूखा भूसा देकर खाना पूर्ति की जा रही या यूं समझे उन्हें जिंदा रखा जा रहा है। सूखे चारे की वजह से गोवंशों का पेट नही भर पाता है। जिससे गोवंश भूख और प्यास से तड़प रहे हैं और कमजोर होकर बीमारियों का शिकार हो जाते हैं। 

योगी सरकार द्वारा बेसहारा गोवंशों से हो रहे किसानों की फसलों की बर्बादी एवं नुकसान से बचाने के लिए लाखों करोड़ों रुपये खर्च कर गौशालाओं का निर्माण करा उनमें गोवंशों के चारे पानी एवं देखभाल की समुचित व्यवस्था की हैं। परंतु जिनके कंधों पर बेसहारा गोवंशों की देखभाल की जिम्मेदारी है, वही गोवंशों पर खर्च होने वाली धनराशि में बंदरबांट कर अपनी अपनी जेबें भर रहे हैं। 

उच्चाधिकारी भी अपने कार्यालयों में बैठ वहीं से कागजी कार्यवाही कर खानपूर्ति करने में जुटे हैं। जबकि गौशालाओं में बेसहारा गोवंशों की हालत बेहद खराब है। सामान्य परिस्थितियों में जहां उन्हें ताजे हरे-चारे और स्वच्छ पानी की व्यवस्था होनी चाहिये। वहां उन्हें केवल सूखे भूसे से संतोष करना पड़ रहा है। 

गौशाला में कई गोवंश बीमार और कमजोर नजर आ रहे हैं। गौशाला के संचालन और देखभाल के लिये शासन से लाखों रुपये का बजट जारी किया गया है। इस बजट का उद्देश्य गोवंशियों के लिये बेहतर चारा, चिकित्सा और आवासीय सुविधाएं प्रदान करना है। 

इसके बावजूद, जमीनी हकीकत इससे बहुत अलग है। गौशाला में उपलब्ध सुविधाएं बहुत ही सीमित और अपर्याप्त हैं, जो एक गंभीर समस्या की ओर इशारा करती हैं। इस बारे में बीडीओ श्वेता त्रिपाठी को फोन किया गया तो उनका फोन रिसीव नहीं हुआ।

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