बांग्लादेश में संकट

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
On

बांग्लादेश में कोटा (आरक्षण) को लेकर सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बीच सोमवार को प्रधानमंत्री शेख हसीना को पद से इस्तीफा देकर देश छोड़ना पड़ा। सेना प्रमुख जनरल वकार-उज-जमान ने  कहा कि अब सेना अंतरिम सरकार बनाएगी। ढाका में हालात बेकाबू हैं। करीब चार लाख लोग कर्फ्यू तोड़कर सड़कों पर हैं। अवामी लीग का मुख्यालय जला दिया गया।

बांग्लादेश में आरक्षण विरोधी हिंसक आंदोलन गत जून माह से जारी है। अशांति में 300 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जिससे यह बांग्लादेश के इतिहास में नागरिक अशांति का सबसे घातक दौर बन गया है। रविवार को देश भर में हुई हिंसक झड़पों में करीब 100 लोग मारे गए। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक हसीना को सेना प्रमुख की ओर से 45 मिनट का अल्टीमेटम दिए जाने के बाद जबरन निर्वासित कर दिया गया। बांग्लादेश में राजनीतिक संकट के बाद असम, बंगाल और पूर्वोत्तर की सीमाओं पर संकट गहराया है। सरकार ने भारत-बांग्लादेश सीमा पर हाई अलर्ट जारी किया है।

सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के अधिकारियों ने कहा कि बीएसएफ ने पड़ोसी देश में घटनाक्रम के मद्देनजर सोमवार को 4,096 किलोमीटर लंबी भारत-बांग्लादेश सीमा पर अपनी सभी संरचनाओं में हाई अलर्ट जारी किया। बीएसएफ देश के पूर्वी हिस्से पर भारतीय मोर्चे की रक्षा करता है,  जो पांच राज्यों पश्चिम बंगाल,  त्रिपुरा, मेघालय, असम और मिजोरम से होकर गुजरता है। गौरतलब है कि शेख हसीना ने बांग्लादेश अवामी लीग (एएल) के संसदीय चुनावों में बड़ी जीत हासिल करने के बाद इस वर्ष जनवरी में देश की प्रधानमंत्री के रूप में लगातार चौथी बार कार्यकाल संभाला था।

आरक्षण विरोधी आंदोलन ने सत्तारूढ़ अवामी लीग को हिलाकर रख दिया था। हालात ऐसे बने कि सोमवार को सेना सड़कों पर तैनात थी लेकिन वह आंदोलनकारियों को रोक नहीं रही थी। इसका मतलब है कि शेख हसीना की सरकार को सेना का समर्थन हासिल नहीं था। साफ है कि बांग्लादेश में हिंसक आंदोलन से सैनिक शासन का रास्ता बना। बांग्लादेश में सैनिक शासन का होना भारत के लिए  चिंता की बात है।

हालांकि बांग्लादेश सेना प्रमुख ने कहा है वे देश के लिए समाधान ढूंढने की कोशिश कर रहे हैं, हमें कुछ समय दीजिए। वहां हुए बदलाव के निहितार्थ को समझकर भारत को वहां के नए सत्ताधारियों के साथ भी संपर्क कायम करना होगा, क्योंकि हमें अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करनी है।