भारत की नजर

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
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पड़ोस के देश बांग्लादेश के घटनाक्रम पर चिंतित होना स्वाभाविक है। भारत इस पर नजर रखे हुए है। मंगलवार को सर्वदलीय बैठक में विदेशमंत्री एस जयशकंर ने बताया कि सरकार बांग्लादेश की सेना के संपर्क में है। वहां की स्थिति लगातार बदल रही है। बांग्लादेश के राजनीतिक घटनाक्रम में बाहरी हाथ के बारे में बात करना जल्दबाजी है।

महत्वपूर्ण बात है कि बांग्लादेश में हिंसा और अस्थिरता को लेकर भारत में सभी राजनीतिक दलों की चिंता समान है। वास्तव में अब वहां क्या हालात बनेंगे? वहां के अल्पसंख्यकों की सुरक्षा कैसे होगी,  इस पर भारत को नजर रखनी होगी। भारत की चिंता बांग्लादेश में रह रहे भारतीय लोगों की सुरक्षा को लेकर भी है। उनकी संख्या करीब 19,000 है, जिनमें 9,000 विद्यार्थी शामिल हैं।

हालांकि अधिकांश छात्र पहले ही भारत वापस आ चुके हैं। अब जब बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के लंदन जाने की योजना कुछ अनिश्चितताओं के कारण अटक गई है और अगले कुछ दिनों तक उनके भारत से बाहर जाने की संभावना नहीं है। ऐसे में सरकार ने तय किया है कि उन्हें थोड़ा समय देना चाहिए। उन्हें स्वयं ही यह फैसला करना है कि वह कहां जाना चाहती हैं।

भारत के लिए यह मामला बहुत महत्वपूर्ण है। जब सरकार ने पूरी तरह से हसीना को अपना समर्थन दिया हुआ है तो ऐसे में सवाल उठेंगे कि बांग्लादेश में होने वाले बदलावों के बीच सरकार अपने हितों की सुरक्षा कैसे करेगी। प्रदर्शनकारी बांग्लादेशी छात्रों की मांग है कि देश में नई अंतरिम सरकार बनाई जाए और नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस को अंतरिम सरकार का मुख्य सलाहकार बनाया जाए।

पिछले दिनों मोहम्मद यूनुस ने भारत सरकार के रवैये के प्रति नाराज़गी जताई थी। वे ढाका में पदस्थ भारतीय दूतावास के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल के उस बयान से क्षुब्ध हैं जिसमें उन्होंने वहां के आंदोलन से उपजी स्थिति पर यह कहकर कोई टिप्पणी करने से इंकार कर दिया था कि यह बांग्लादेश का अंदरूनी मामला है।  जबकि यूनुस चाहते थे कि भारत शेख हसीना सरकार की इस मामले को लेकर आलोचना करे। अब देखना यह है कि अंतरिम सरकार, कैसी बनती है, किस प्रकार से हालात को सुधारती है। उसका भारत के प्रति नजरिया कैसा होगा? नई सरकार कहीं इस्लामिक कट्टरवाद को बढ़ावा तो नहीं देगी। उसका रुख पाकिस्तान और चीन समर्थक तो नहीं होगा? उसके रुख के आधार पर भारत को अपनी नई नीति बनानी होगी।