बरेली : करोड़ों का खर्च... फिर भी मच्छरों पर काबू पाने की कोशिश नाकाम
जिले में साल दर साल लगातार बढ़ रहा है मलेरिया और डेंगू का प्रकोप
अंकित चौहान, बरेली अमृत विचार। मच्छरों पर काबू पाने के लिए साल दर साल करोड़ों खर्च करने के बावजूद मलेरिया और डेंगू के लगातार बढ़ रहे केस इस बजट के उपयोग पर सवाल खड़े कर रहे हैं। पिछले तीन साल में स्वास्थ्य विभाग ने करीब साढ़े चार करोड़ का बजट खपाया है लेकिन इसी अवधि में डेंगू-मलेरिया के केसों का आंकड़ा बढ़कर करीब दोगुना हो चुका है।
संचारी रोगों पर नियंत्रण के लिए अभियान चलाने को शासन की ओर से हर साल स्वास्थ्य विभाग को डेढ़ करोड़ रुपये का बजट भेजा जाता है। इस बजट का इस्तेमाल जागरूकता के लिए प्रचार-प्रसार, अभियान में सहयोग करने वाली जो आशा कार्यकर्ताओं और लार्वा खोजने के लिए रखे गए डोमेस्टिक ब्रीडिंग चेकर्स की टीमों काे भुगतान करने के लिए खर्च किया जाता है लेकिन मरीजों की बढ़ती संख्या बता रही है कि इतना बजट खर्च करके भी कोई वांछित नतीजा नहीं निकल पा रहा है।
जिला मलेरिया विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में वर्ष 2022 में मलेरिया के 2228 केस मिले थे लेकिन 2023 में बढ़कर 3490 हो गए। इस साल जनवरी से अब तक 742 लोगों में मलेरिया की पुष्टि हो चुकी है। जिले में शेरगढ़, मझगवां, फतेहगंज पश्चमी, बिथरी चैनपुर और भमोरा को मलेरिया के लिहाज से संवेदनशील घोषित किया गया है। पिछले साल जहां मीरगंज में मलेरिया के सर्वाधिक केस सामने आए थे, वहीं इस साल अब तक शेरगढ़ में मरीजों की संख्या सबसे ज्यादा है। विभागीय अधिकारी दावा करते हैं कि इस साल मलेरिया की जांचों की संख्या ज्यादा है, इसी कारण मरीज बढ़ते दिख रहे हैं।
ये है स्वास्थ्य विभाग का दावा
अफसरों के मुताबिक डेंगू-मलेरिया पर नियंत्रण के लिए इस बार जिले भर में 3273 टीमें लगाई गई हैं। ये टीमें घर-घर सर्वे कर रही हैं और लक्षण मिलने पर जांच कर लोगों को त्वरित इलाज मुहैया करा रही है। जहां भी मलेरिया का मरीज मिलता है, वहां फौरन एंटी लार्वा का छिड़काव कर फागिंग कराई जा रही है, लेकिन जिस तरह मच्छरों का प्रकोप बढ़ रहा रहा है, उससे इन विभागीय दावों पर सवाल खड़ा हो रहा है।
संचारी रोगों पर नियंत्रण के लिए टीमें करीब तीन महीने से लगातार सर्वे कर रही हैं। विभाग भी कड़ी निगरानी कर रहा है। ज्यादा जांचें किए जाने से मरीजों की संख्या बढ़ रही है, लेकिन उनके स्वस्थ होने का ग्राफ भी ज्यादा है। - डॉ. विश्राम सिंह, सीएमओ
