जम्मू-कश्मीर में चुनाव

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
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दस वर्ष बाद जम्मू-कश्मीर में होने वाले विधानसभा चुनाव में आतंकवाद-सुरक्षा जैसे मुद्दे बड़े हैं। वहां शांतिपूर्ण चुनाव न केवल चुनाव आयोग, राजनीतिक दलों बल्कि भारतीय सेना के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। निर्वाचन आयोग ने शुक्रवार को घोषणा की कि जम्मू-कश्मीर में तीन चरणों में विधानसभा चुनाव होंगे।

विधानसभा चुनाव कराने के लिए क्षेत्रीय दलों की बढ़ती मांग के बीच आयोग की टीम ने पिछले दिनों राज्य में चुनाव तैयारियों का जायजा लिया था। जम्मू-कश्मीर में वर्ष 2019 में धारा 370 हटने व केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद पहली बार विधानसभा चुनाव हो रहे हैं। क्योंकि 2019 तक यह जम्मू और कश्मीर राज्य का एक हिस्सा था, जब राज्य का विशेष दर्जा रद कर दिया गया था और इसे जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 के तहत दो केंद्र शासित प्रदेशों (जम्मू और कश्मीर और लद्दाख) में विभाजित किया गया था।

इस फैसले को चुनौती देनी वाली याचिकाओं पर सुनवाई करने वाली उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता में पांच न्यायमूर्तियों की पीठ ने सर्वसम्मति से फैसला देते हुए जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे को खत्म करने का फैसला बरकरार रखा था। साथ ही शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार को इस साल सितंबर तक इस पूर्ववर्ती राज्य में विधानसभा चुनाव कराने के लिए कदम उठाने को कहा था। जम्मू-कश्मीर में पिछला विधानसभा 2014 में पांच चरणों में हुआ था। तब यह एक राज्य था और लद्दाख उसका हिस्सा था। 

2018 में पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी-भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की गठबंधन सरकार के पतन के बाद, जम्मू-कश्मीर में कोई प्रतिनिधि सरकार नहीं थी। सरकार के दावों के बावजूद वहां आतंकी घटनाएं बढ़ीं। इसके बाद लोकसभा चुनाव में माहौल बदला।

महत्वपूर्ण है कि मतदाताओं ने चुनाव बहिष्कार की पिछली प्रवृत्ति से पीछे हटकर पांच लोकसभा सीटों पर 58 प्रतिशत का ऐतिहासिक मतदान किया था। जबकि 1990 के बाद से जम्मू-कश्मीर का मतदान प्रतिशत कभी भी 50 प्रतिशत के आंकड़े को पार नहीं कर पाया। लोकतंत्र की ऐसी झलक से पता लगता है कि वहां की जनता बदलाव चाहती है।

मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि जनता इस बदलाव का हिस्सा भी बनना चाहती है। वास्तव में अप्रैल-मई में हुए लोकसभा चुनाव में मतदाताओं द्वारा दिखाए गए विश्वास से केंद्र को उत्साहित होना चाहिए कि हर कोई चुनाव में लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भागीदारी सुनिश्चित करना चाहता था। पिछले दिनों वहां आतंकी घटनाएं फिर से बढ़ी हैं। इसी वर्ष जम्मू क्षेत्र में जुलाई में तो स्थिति यह थी कि जम्मू क्षेत्र में 10 जगहों पर आतंकी हमले हो गए थे, जिनमें 12 जवान शहीद हुए। उम्मीद की जानी चाहिए कि  विधानसभा चुनाव के बाद राजनीतिक रूप से अस्थिर क्षेत्र में शांति स्थापित होगी और खुशहाली कायम होगी।