लखनऊ: कर्मचारी बिना प्रमोशन के हो रहे सेवानिवृत्त, 77 साल बाद भी नहीं बदला नियम, इस दिन शुरू हो सकता है आंदोलन
लखनऊ, अमृत विचार। प्रदेश में 17 नगर निगम, 200 नगर पालिका और 454 के करीब नगर पंचायतों के कर्मचारियों की हालत में बदलाव नहीं हो रहा है। जलकल में तैनात कर्मचारियों का हाल भी कुछ ऐसा ही है। यह कर्मचारी लंबे समय से अपने अधिकारों के लिए संघर्षरत भी हैं, लेकिन आजादी के 77 वर्ष बीत जाने के बाद भी सेवा सम्बंधी विसंगति दुर नहीं हो पाई है।
उत्तर प्रदेश स्थानीय निकाय कर्मचारी महासंघ की तरफ से कहा गया है कि कर्मचारी जिन पदों पर भर्ती हैं, वहीं से सेवानिवृत्त हो रहे हैं, कोई पदोन्नति के अवसर नहीं दिए जा रहे, जबकि छठवें वेतन आयोग की रिपोर्ट में साफ साफ कहा गया कि जो वेतन, भत्ते, पद नाम, पदोन्नति के अवसर राज्य कर्मचारियों को अनुमन्य है वहीं निकाय कर्मियों पर प्रभावी होंगे, उसके बाद भी हमारी सेवाओं के एक भी कैडर का पुनर्गठन नहीं किया गया, यहां तक आज हमारे कर्मचारी सेवा आदेश 1962 पर ही काम करने को मजबूर हैं, जबकि निकायों का सीमा विस्तार हो चुका है, रोज नयी निगमों, नगर पालिका तथा नगर पंचायतों का गठन हो रहा, यहां तक कि नयी गठित नगर निगमों मथुरा वृन्दावन, अयोध्या, शाहजहांपुर और सहारनपुर के कर्मचारी आज भी उसी वेतन, भत्तो पर काम कर रहे हैं।
महासंघ लगातार सेवा सम्बंधी दिक्कतों, वेतन विसंगति, अंग्रेजों के जमाने के सेवा आदेश में आज की जरूरत के हिसाब से संशोधन, पदों का पुनर्गठन, सातवें वेतन आयोग प्रभावी होने के बाद लिपिक, राजस्व आदि पदों के पुनर्गठन की मांग कर रहा है। निकायों में कम्प्यूटर, चालक, जलकल के पम्प चालक,बिल कलेक्टर,बिल सर्वर आदि टेक्निकल पदों के कर्मचारियों के साथ सफाई ,चतुर्थ श्रेणी संवर्गो को कोई पदोन्नति नहीं मिल रही है।
साल 31 दिसम्बर 2001 तक कार्यरत दैनिक वेतन, संविदा कर्मियों को विनियमित करने के लिए जारी शासनादेश के बाद आज भी प्रदेश के निकाय कर्मियों का अभी तक विनियमतीकरण नहीं किया गया। इतना ही नहीं संविदा कर्मियों का स्थायी करण के लिए भी कोई नीति नहीं है,साथ ही आऊटसोर्सिंग कर्मचारियों की सेवा सुरक्षा, सेवा नीति,नियम कानून, जीने लायक वेतन,पद के अनुरूप वेतन, भत्ते,बीमा आदि की कोई व्यवस्था नहीं है।
इन परिस्थितियों में महासंघ पिछले कई सालों से संघर्ष करते हुए सैकड़ों आन्दोलन, धरना, प्रदर्शन व ज्ञापन दे चुका है। वहीं शासन स्तर पर बैठकें करने के बाद भी एक भी समस्या का समाधान नहीं किया गया, जिससे आज प्रदेश की निकायों में घोर निराशा के साथ साथ कर्मचारी मरने जीने को तैयार हैं। यदि अभी भी कर्मचारियों की समस्याओं के बारे में सरकार संज्ञान नहीं लेती है और मांगे नहीं मानती है, तो 21 अगस्त के बाद आर-पार का संघर्ष होगा।
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