प्रयागराज : जबरन धर्मांतरण करने वाले मौलाना की जमानत याचिका खारिज
अमृत विचार, प्रयागराज । इलाहाबाद हाईकोर्ट ने धर्मांतरण से जुड़े एक मामले में अपनी तल्ख टिप्पणी में कहा कि फादर, कर्मकांडी, मौलवी या मुल्ला, चाहे कोई भी पदनाम हो, अगर वह किसी व्यक्ति का बलपूर्वक, गलत बयानी, धोखाधड़ी, अनुचित प्रभाव, जबरदस्ती और प्रलोभन देकर धर्मांतरण कराता है तो उसे उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम, 2021 की धारा 2(i) के तहत दोषी माना जाएगा।
उक्त टिप्पणी न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल की एकलपीठ ने पुलिस स्टेशन अंकुर विहार, गाजियाबाद में दर्ज मामले में मोहम्मद शाने आलम को जमानत देने से इनकार करते हुए की। मौलाना पर पीड़िता को जबरन इस्लाम में धर्मांतरित करने और एक मुस्लिम व्यक्ति के साथ निकाह करने का आरोप है। हालांकि याची के अधिवक्ता का तर्क था कि याची ने मार्च 2024 में केवल पीड़िता का निकाह करवाया था।
उसके द्वारा धर्मांतरण का कोई प्रयास नहीं किया गया था जबकि सरकारी अधिवक्ता ने जमानत याचिका का विरोध करते हुए कोर्ट को बताया कि पीड़िता ने सीआरपीसी की धारा 164 के तहत यह बताया है कि उसे इस्लाम स्वीकार करने के लिए मजबूर किया गया था और मार्च 2024 में निकाह करवाया गया था। अंत में कोर्ट ने पीड़िता के बयान पर विचार करते हुए याचिका खारिज कर दी।
यह भी पढ़ें- तिहरा हत्याकांड : हिस्ट्रीशीटर लल्लन खां के बेटे फराज अहमद के 11.29 लाख रुपये सीज
