आतंक के संगठन
यह बात तो जगजाहिर है कि जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी संगठनों को धन मुहैया कराने में कहीं न कहीं पाकिस्तान का प्रत्यक्ष रूप से हाथ रहता है। आतंक के आका अपने गुर्गों को यहां पैसा मुहैया कराते हैं ताकि उनकी आतंक की फैक्ट्री लगातार संचालित होती रहे। मगर आतंकियों को पैसा अगर देश के भीतर से …
यह बात तो जगजाहिर है कि जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी संगठनों को धन मुहैया कराने में कहीं न कहीं पाकिस्तान का प्रत्यक्ष रूप से हाथ रहता है। आतंक के आका अपने गुर्गों को यहां पैसा मुहैया कराते हैं ताकि उनकी आतंक की फैक्ट्री लगातार संचालित होती रहे। मगर आतंकियों को पैसा अगर देश के भीतर से ही यहां चल रहे संगठन मुहैया करा रहे हैं तो यह बहुत ही गंभीर मामला है।
आतंकी फंडिंग मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने जम्मू-कश्मीर और यहां से बाहर संचालित हो रहे पंजीकृत एवं गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) की जांच की है तो यह सनसनीखेज खुलासा हुआ है।दिल्ली में अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व अध्यक्ष जफर उल इस्लाम खाम के नेतृत्व वाले गैर सरकारी संगठन चैरिटी एलायंस पर छापे के दौरान भी तमाम दस्तावेज और इलेक्ट्रानिक उपकरण जब्त किए गए हैं। इसके अलावा जम्मू-कश्मीर के तमाम संगठनों की भी जांच की जा रही है, जिन पर आतंकी संगठनों को धन मुहैया कराने का शक है।
जम्मू-कश्मीर के अलगाववादी नेता अपने बयानों से देश के भीतर तो जहर घोलते ही रहे हैं मगर इनका आतंकियों से सीधा संबंध भी इस बार हुआ है। हुर्रियत कांफ्रेंस के जफर अकबर जैसे नेता भी उनकी संगठनों का नेतृत्व कर रहे हैं, जो आतंकियों को पैसा उपलब्ध करा रहे हैं। देश के भीतर इन नेताओं की ऐसी गतिविधियों में संलिप्तता यह बताती है कि हमें ऐसे देशद्रोहियों से पहले निपटने की जरूरत है, जिनकी मदद से आतंकी हमें घाव देते आ रहे हैं। इन संगठनों की बहुत गहराई से जांच करके जरूरत उन लोगों को सामने लाने की है, जो हमारे देश के भीतर हमारा ही नमक खाकर हमारी ही पीठ में छुरा घोंप रहे हैं। जम्मू-कश्मीर में आतंक के हालात यह हैं कि हर दिन वहां कोई न कोई वारदात सामने आती है।
हमारे सैनिक तो शहीद होते ही हैं, अब आतंकियों ने देश हित की बातें करने वाले राजनीतिक दलों के पदाधिकारियों को भी निशाने पर लेना शुरू कर दिया है। ऐसा करके उनकी कोशिश है कि जम्मू-कश्मीर के लोग मुख्य धारा की राजनीति से न जुड़ पाएं। साफ तौर पर इन बातों के पीछे पाकिस्तान का हाथ है, मगर उन देशद्रोहियों को क्या हो, जो यहां रहकर ही हमारे खिलाफ आतंकी साजिशें रचने के लिए धन फंडिंग कर रहे हैं। एनआईए जांच अभी प्रारंभिक चरण में है। कोशिश हो कि देश के भीतर बैठे उन लोगों को बेनकाब किया जाए जो आतंकियों मददगार हैं ताकि घाटी में शांति बहाली की दिशा में काम हो सके।
