बिहार के बाद बंगाल

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Edited By Amrit Vichar
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बिहार के विधानसभा चुनाव का मतदान अंतिम चरण में है। यहां नतीजे जो भी सामने आएं लेकिन इसके बाद पश्चिम बंगाल में चुनावी रणभेरी बजनी है। अगले साल 2021 के अप्रैल माह में पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव होने हैं। इसके लिए अभी से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और भाजपा के अलावा कांग्रेस आदि दलों ने …

बिहार के विधानसभा चुनाव का मतदान अंतिम चरण में है। यहां नतीजे जो भी सामने आएं लेकिन इसके बाद पश्चिम बंगाल में चुनावी रणभेरी बजनी है। अगले साल 2021 के अप्रैल माह में पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव होने हैं।

इसके लिए अभी से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और भाजपा के अलावा कांग्रेस आदि दलों ने चुनावी तैयारी शुरू कर दी है। केंद्रीय गृ़ह मंत्री और भाजपा के चाणक्य अमित शाह का कोलकाता में हालिया दौरा चुनावी तैयारी की कड़ी है। माना जा रहा है कि वह अपने इस दौरे को भाजपा के मिशन बंगाल का रूप देना चाहते हैं।

नि:संदेह पश्चिम बंगाल फिलहाल ममता बनर्जी का गढ़ है और बंगाल की शेरनी के गढ़ को भेद पाना असंभव तो नहीं बेहद मुश्किल है। ऐसा इसलिए क्योंकि उनके खिलाफ राज्य में न तो कोई खास असंतुष्टि है, न ही कोई बगावत। पश्चिमी बंगाल की जनता ममता बनर्जी पर विश्वास करती है और उनके शासन को कितना पसंद करती आ रही है इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वह लगातार एक दशक से वहां की मुख्यमंत्री हैं। सियासत में उनके तेवर का अंदाजा भी इसी से लगाया जा सकता है कि जिस पश्चिम बंगाल को वामपंथियों का गढ़ माना जाता था उसको भेदकर ममता बनर्जी ने तृणमूल कांग्रेस को स्थापित कर दिया।

हालांकि राज्य में भाजपा हिंदुत्व और राष्ट्रवाद के मुद्दों पर ममता बनर्जी को घेरती रही है। आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा इसी मुद्दे को तूल देकर ममता बनर्जी का किला ढहाने में एड़ी से चोटी तक का जोर लगाएगी। वैसे, भाजपा और ममता बनर्जी में पिछले काफी समय से सियासी अदावत चली आ रही है। कई मुद्दों पर दोनों के बीच खींचतान देखने को मिली है। आगे भी चुनाव तक सियासी चिंगारी खूब सुलगेगी लेकिन इसके नतीजे क्या होंगे, इसका फिलहाल सिर्फ अंदाजा ही लगाया जा सकता है।

लेकिन एक बात तो तय है कि अगले कुछ महीने पश्चिम बंगाल की सियासत तेज होने जा रही है। कोई दोराय नहीं कि भाजपा राज्य की सत्ता के लिए कोई कोर-कसर बाकी नहीं रखेगी। पश्चिम बंगाल की जंग को जीतना भाजपा अपने लिए बहुत अहम मानकर चल रही है। ऐसे में उसके रणनीितकार हर वो दांव खेलेंगे जो ममता बनर्जी को सत्ता से बाहर कर दे। इसके लिए कुछ दलों से गठबंधन भी करना पड़ सकता है लेकिन ममता भी भाजपा के हर वार का जवाब देने को जैसे तैयार बैठी हैं इसलिए नि:संदेह पश्चिम बंगाल की चुनावी जंग बेहद कड़ी और रोचक हो जाएगी।