बिडेन की जीत

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Edited By Amrit Vichar
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डोनाल्ड ट्रंप चुनाव हार गए। जो बिडेन अमेरिका के नए राष्ट्रपति चुने गए हैं। ट्रंप का कार्यकाल अगले साल जनवरी में पूरा हो रहा है तभी बिडेन राष्ट्रपति की कुर्सी संभालेंगे। अमेरिका में ट्रंप का जाना और बिडेन का आना निसंदेह पूरी दुनिया के लिए सत्ता परिवर्तन का अभूतपूर्व घटनाक्रम है इसलिए क्योंकि अमेरिका की …

डोनाल्ड ट्रंप चुनाव हार गए। जो बिडेन अमेरिका के नए राष्ट्रपति चुने गए हैं। ट्रंप का कार्यकाल अगले साल जनवरी में पूरा हो रहा है तभी बिडेन राष्ट्रपति की कुर्सी संभालेंगे। अमेरिका में ट्रंप का जाना और बिडेन का आना निसंदेह पूरी दुनिया के लिए सत्ता परिवर्तन का अभूतपूर्व घटनाक्रम है इसलिए क्योंकि अमेरिका की नीतियों से दुनिया के कई देशों पर प्रभाव पड़ता है।

ऐसे वक्त में जब पूरा विश्व कोरोना महामारी से जूझ रहा है और इसके चलते दुनिया भर में आर्थिक व अन्य मोर्चों पर उथल-पुथल है अमेरिका के अगले कदम पर सबकी निगाहें लगी हुई हैं। इसलिए भी, जब चीन खुद को आर्थिक शक्ति संपन्न बनाने में जुटा हुआ है।

जहां तक भारत का सवाल है, ट्रंप अपने पूरे कार्यकाल में हमसे बेहतर रिश्ते बनाए रहे। जम्मू-कश्मीर में धारा 370 के मसले पर भी उन्होंने भारत के कदम के प्रति सकारात्मक रवैया रखा जबकि इसके विपरीत जो बिडेन ने भारत सरकार के इस कदम पर आपत्ति की थी। ऐसे में बिडेन के राष्ट्रपति बनने के बाद भारत और अमेरिका के रिश्तों को नए सिरे से परिभाषित होना है। दोनों देशों के मध्य रिश्तों का पुनर्स्थापन होना है। ये रिश्ते नरम ही रहेंगे, ऐसी उम्मीद इसलिए भी की जानी चाहिए क्योंकि चीन से हमारे रिश्ते तल्ख हुए हैं।

जाहिर है कि अमेरिका चीन और उसके समर्थक देशों के साथ तो सैद्धांतिक तौर पर खड़ा होने से रहा। जहां तक पाकिस्तान का सवाल है तो वह भारत में आतंकवाद फैलाने की अपनी तमाम करतूतों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर घिरता रहा है। यह भी जगजाहिर है कि पाकिस्तान को चीन का आर्थिक और अपरोक्ष सहयोग भी हासिल है। ऐसे में अमेरिका कभी भी आतंक को बढ़ावा देने वाले देश के साथ खड़ा नहीं हो सकता। वह भी तब जब आतंकवाद ने कई बार उसको भी नुकसान पहुंचाया है।

ऐसे में, अमेरिका को खुद आतंकवाद, चीन के आर्थिक साम्राज्यवाद को रोकने के लिए कारगर रणनीति बनानी है और इसमें सहयोगी देशों को साथ लेकर चलना उसकी मजबूरी होगी। इनमें भारत प्रमुख है। यह हो ही नहीं सकता है कि राष्ट्रपति के रूप में जो बिडेन की नीतियां अमेरिकी नीतियों के अनुकूल न हों, इसलिए उनके कार्यकाल में भारत के प्रति अमेरिका के रवैये में बदलाव की आशंका जाहिर करने वालों को परेशान होने की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए।

वैसे भी, भारत अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत हुआ है। उसकी विदेश नीति भी कारगर है और मित्रवत व्यवहार बनाए रखने वाले दूसरे देशों से सामंजस्य बनाए रखने का तरीका भी आता है इसलिए अमेरिका में सत्ता परिवर्तन के बाद भी उसके और भारत के बेहतर संबंधों और अच्छे सामंजस्य की उम्मीद की जानी चाहिए।