भारत के लिए बड़े अवसर
पिछले कुछ वर्षों से सरकार और उद्योग जगत की नीतियों में स्पष्ट झलक रहा है कि हम एक दिन जरूर विकसित भारत के लक्ष्य को अपने दम पर हासिल करने में कामयाब होंगे। भारत की निर्यात उपलब्धियां इसकी उभरती हुई विनिर्माण क्षमताओं, रणनीतिक नीतियों और नवाचार के प्रति प्रतिबद्धता का प्रमाण हैं। भारत वैश्विक निर्यात बाजार में एक प्रमुख देश के रूप में उभरा है जिसने विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय वृद्धि दिखाई है। ऐसे में नीति आयोग के मुख्य कार्यपालक अधिकारी बीवीआर सुब्रमण्यम ने बुधवार को कहा कि अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा चीन समेत तीन व्यापारिक साझेदारों पर उच्च सीमा शुल्क लगाने की घोषणा से भारत के लिए बड़े निर्यात अवसर पैदा होंगे।
घरेलू उद्योग को इस अवसर का लाभ उठाने के लिए खुद को तैयार करना चाहिए। ट्रंप ने पिछले सप्ताह मेक्सिको और कनाडा से आयात पर 25 प्रतिशत सीमा शुल्क और चीन से आयात पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाने की बात कही थी। इस कदम की वजह से अमेरिकी व्यापार में बड़ी रुकावटें आने वाली हैं और इससे भारत के लिए बड़े अवसर पैदा होंगे।
अहम है कि ट्रंप ने अक्टूबर 2020 में भी भारत को ‘टैरिफ किंग’ करार दिया था। टैरिफ राष्ट्रों के मध्य होने वाले व्यापारिक आयात या निर्यात पर लगने वाला सीमा शुल्क है। यह व्यापार के क्षेत्र में बढ़ती वैश्विक प्रतिस्पर्द्धा से घरेलू उद्योग को सुरक्षित रखने हेतु विदेशी उत्पादों पर लगाया जाने वाला कर है। भारत की औसत टैरिफ दर 13.8 प्रतिशत है, जो विश्व की किसी भी प्रमुख अर्थव्यवस्था की तुलना में सबसे अधिक है। इसके बावजूद अत्यधिक टैरिफ एवं गैर-टैरिफ बाधाओं के कारण अमेरिका के निर्यात का केवल 13 वां हिस्सा भारत आता है, जबकि भारत के निर्यात का सबसे बड़ा हिस्सा अमेरिका जाता है।
महत्वपूर्ण है कि केंद्र सरकार ने निर्यात बढ़ाने, निवेश आकर्षित करने और व्यापार करने में आसानी को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न पहलों और नीतियों को लागू किया है। निर्यात केद्रों के रूप में जिलों की पहल प्रत्येक जिले में निर्यात-संभावित उत्पादों की पहचान करती है। विदेशों में भारतीय मिशन भारत के व्यापार, पर्यटन, प्रौद्योगिकी और निवेश लक्ष्यों को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। गौरतलब है कि अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है।
पिछले वित्त वर्ष में भारत का अमेरिका को निर्यात 77.51 अरब डॉलर रहा, जबकि आयात 42.2 अरब डॉलर रहा। कुल मिलाकर वैश्विक आर्थिक महाशक्ति बनने की दिशा में भारत की यात्रा इसके निर्यात परिदृश्य में उल्लेखनीय उपलब्धियों से चिह्नित है। विभिन्न पहल भारत के व्यापार को बढ़ाने और समावेशी विकास को बढ़ावा देने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित करती हैं, जिससे 2047 तक भारत एक वैश्विक आर्थिक महाशक्ति के रूप में स्थापित
हो जाएगा।
