अधिकारों का रिकार्ड

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Edited By Amrit Vichar
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सरकार ने ग्रामीण भारत में संपत्तियों को वैध बनाने और उन्हें आर्थिक विकास का आधार बनाने के लिए स्वामित्व योजना के तहत 2.19 करोड़ संपत्ति कार्ड बांटने का लक्ष्य रखा है। निश्चित रूप से यह योजना गांवों की तस्वीर बदलकर उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत करेगी। योजना के तहत एक ही दिन में लगभग 65 लाख संपत्ति कार्ड वितरित करना सरकार की प्रतिबद्धता और एक बड़ी उपलब्धि का प्रतीक है। शनिवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी स्वामित्व संपत्ति कार्डों के ई-वितरण की अध्यक्षता करेंगे। कार्यक्रम में 10 राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों के 50,000 से अधिक गांवों में स्वामित्व संपत्ति कार्ड वितरित किए जाएंगे।

कहा जा सकता है यह ऐतिहासिक क्षण भारत के ग्रामीण सशक्तिकरण और शासन यात्रा में एक मील का पत्थर होगा। इस योजना के पायलट चरण को महाराष्ट्र, कर्नाटक, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश और पंजाब व राजस्थान के चुनिंदा गांवों में वर्ष 2020-21 के दौरान लागू किया गया था। स्वामित्व योजना का ग्रामीण भारत पर भूमि प्रशासन को मजबूत करने, वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने और ग्रामीण सामुदायिक विकास को गति देने के माध्यम से परिवर्तनकारी प्रभाव पड़ा है। इस योजना से गांव के परिवारों, ग्राम पंचायतों, राज्यों और अर्थव्यवस्था के अन्य क्षेत्रों को अत्यधिक लाभ मिलेगा।

योजना मार्च 2026 तक पूरी होगी। इसके तहत संपत्तियों का मुद्रीकरण होगा। बैंक से कर्ज लेना आसान होगा। संपत्ति से जुड़े विवाद कम होंगे। साथ ही गांव स्तर पर बेहतर योजना बनाई जा सकेंगी। प्रॉपर्टी कार्ड की मदद से गांव का सटीक लैंड रिकॉर्ड होने के साथ-साथ आर्थिक उपार्जन की संभावना भी बढ़ेगी। योजना का उद्देश्य गांव में कृषि भूमि से अलग आबादी वाले क्षेत्र के लिए राजस्व दस्तावेजों में जमीनों का रिकॉर्ड बनाना है। 

इस योजना के तहत प्रॉपर्टी कार्ड बनवाने के लिए किसी आवेदन की जरूरत नहीं होगी। जैसे-जैसे मैपिंग और सर्वे का काम पूरा किया जाएगा, सरकार खुद ही सभी लोगों को उनका प्रॉपर्टी कार्ड देती जाएगी। गांव का सर्वे पूरा होने के बाद प्राप्त डाटा को पंचायती राज्य मंत्रालय के ई ग्राम स्वराज पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा। फिर भी एक देश के रूप भारत अभी भी एक उचित विश्वसनीय और आसान डेटा संरक्षण कानून बनाने से दूर है और इस तरह के कानून के बिना डेटा का संग्रह और इसका दुरुपयोग हमेशा इस तरह की महत्वाकांक्षी योजना के लिए चुनौती बना रहेगा।

अनुमानित समय के भीतर गांवों को निगरानी में लाने का मुद्दा एक चुनौती है। क्योंकि एक निश्चित बिंदु के बाद गांवों को कवरेज करने की गति को बढ़ाया नहीं जा सकता है। इसके लिए एक समर्पित केंद्र-राज्य सहयोग किया जाए ताकि यह योजना पूरे देश में प्रभावी ढंग से लागू हो सके।