आउटसोर्सिंग कर्मचारियों में बढ़ रहा आक्रोश, मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर सुनाई पीड़ा, दस साल से नहीं बढ़ा वेतन
लखनऊ, अमृत विचार। सरकार स्थायी कर्मियों को समय-समय पर वेतन बढ़ोतरी का लाभ देती है। गुरुवार को केंद्र सरकार की तरफ से आठवें वेतन आयोग के गठन को मंजूरी भी दे दी गई है, जिससे सभी विभागों में कार्यरत स्थायी अधिकारियों और कर्मचारियों को लाभ मिलेगा। वहीं, उन्हीं विभागों चिकित्सा स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा, शिक्षा, बिजली विभाग, नगर निकाय, पंचायती राज में कार्यरत विभिन्न पदों के लाखों आउटसोर्स कर्मियों को कोई भी लाभ नहीं मिलेगा। इतना ही नहीं, पिछले दस सालों से आउटसोर्सिंग पर कार्यरत कर्मचारियों की वेतन बढ़ोतरी का कोई लाभ भी नहीं मिला है।
इतना ही नहीं, आउटसोर्स के लिए जेम पोर्टल पर संबंधित शासनादेश में वार्षिक वेतन वृद्धि की कोई व्यवस्था भी नहीं की गई है। दस वर्ष से कर्मचारी निर्धारित वेतनमान पर कार्य कर रहे हैं। यह कहना है संयुक्त स्वास्थ्य आउटसोर्सिंग/संविदा कर्मचारी संघ के प्रदेश महामंत्री सच्चिता नंद मिश्रा का। उन्होंने आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के वेतन निर्धारण के लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री को पत्र भी लिखा है। इस पत्र में आउटसोर्स पर तैनात कर्मचारियों की समस्या बताई गई है।
महामंत्री सच्चिता नंद मिश्रा ने कहा कि चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधीन चिकित्सा संस्थानों, मेडिकल कॉलेजों के 73 प्रकार के पदों का वेतन निर्धारण संबंधी कमेटी की रिपोर्ट पिछले दो वर्ष से शासन में लंबित है, जबकि मेडिकल कॉलेज और संस्थानों का विस्तार सरकार का ड्रीम प्रोजेक्ट है। केजीएमयू, लोहिया, पीजीआई कैंसर संस्थान के लगभग 20 हजार आउटसोर्स कर्मी भी वर्षों से उपेक्षित हैं। तेजी से बढ़ रही आउटसोर्स प्रथा में सरकार के अन्य विभागों में लाखों की संख्या में कर्मचारी वर्षों से सेवा दे रहे हैं, जिसमें बिजली, पंचायती राज, शिक्षा, प्राविधिक शिक्षा, नगर निकाय, ग्राम विकास, जल निगम जैसे कई विभागों का संचालन आज पूरी तरह से संविदा कर्मियों पर निर्भर है।
ऐसे में लाखों कर्मियों की वेतन बढ़ोतरी न किया जाना तथा महंगाई के अनुरूप वेतन निर्धारण न करके केवल स्थायी कर्मियों पर ध्यान देना युवा अनुभवी योग्य आउटसोर्स कर्मियों के साथ सौतेला व्यवहार है और इससे लाखों कर्मचारी आक्रोशित हैं। संयुक्त स्वास्थ्य आउटसोर्सिंग संविदा कर्मचारी संघ इन कर्मियों का संयुक्त संगठन है। सरकार को जल्द प्रदेश के सभी लाखों आउटसोर्स कर्मियों को महंगाई के अनुसार वार्षिक वेतन वृद्धि के साथ ही शासन में लंबित चिकित्सा शिक्षा विभाग के 73 प्रकार के पदों के कर्मियों का वेतन निर्धारण संबंधी शासनादेश जारी करना चाहिए।
यह भी पढ़ेः पुनर्वास विवि: CUET से परास्नातक में प्रवेश शुरू, 26 पाठ्यक्रमों में होंगे एडमिशन, जाने लास्ट डेट
