बरेली कॉलेज में इस सिस्टम से पढ़ाई कराने की तैयारी

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बरेली,अमृत विचार। शासन ने विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में कोरोना नियमों का पालन कराते हुए रोस्टर से भौतिक कक्षाएं लगाने का आदेश जारी कर दिया है। इस आदेश के तहत कक्षाएं लगाना महाविद्यालयों में बड़ी चुनौती होगा। सबसे ज्यादा दिक्कत बरेली कॉलेज जैसे महाविद्यालयों को होनी है क्योंकि यहां काफी संख्या में विद्यार्थी पंजीकृत हैं। इसके …

बरेली,अमृत विचार। शासन ने विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में कोरोना नियमों का पालन कराते हुए रोस्टर से भौतिक कक्षाएं लगाने का आदेश जारी कर दिया है। इस आदेश के तहत कक्षाएं लगाना महाविद्यालयों में बड़ी चुनौती होगा। सबसे ज्यादा दिक्कत बरेली कॉलेज जैसे महाविद्यालयों को होनी है क्योंकि यहां काफी संख्या में विद्यार्थी पंजीकृत हैं। इसके साथ ही पाठ्यक्रम को पूरा कराना भी किसी चुनौती से कम नही है क्योंकि सत्र का 70 फीसदी समय निकल चुका है।

नया शासनादेश आने के बाद बरेली कॉलेज ने भी कक्षाएं लगाने को लेकर तैयारियां शुरू कर दी हैं। बरेली कॉलेज ऑड व ईवन नंबरों से विद्यार्थियों को बुलाने की तैयारी कर रहा है। प्राचार्य अनुराग मोहन 20 नवंबर को इस संबंध में अधिकारियों के साथ बैठक करेंगे। बैठक में आने वाले बेहतर सुझावों के तहत कक्षाएं शुरू की जाएंगी।

शासन ने 23 नवंबर से भौतिक कक्षाएं, प्रयोगशालाएं व छात्रावास खोलने की अनुमति दी है। सभी को किस तरह से खोला जाएगा, सभी की अलग-अलग एसओपी भी जारी की गई है। इसके अलावा शिक्षकों, विद्यार्थियों, अभिभावकों व कर्मचारियों सभी की जिम्मेदारी भी तय की गई है। महाविद्यालय या विश्वविद्यालय परिसर में थर्मल स्क्रीनिंग जरूरी है। कक्षाओं में क्षमता के सिर्फ 50 फीसदी विद्यार्थी ही बैठ सकते हैं। इसके अलावा दो विद्यार्थियों के बीच में 6 फीट की दूरी भी होनी चाहिए। कोई भी विद्यार्थी आपस में पेन, नोटबुक, लैपटॉप शेयर भी नहीं कर सकेंगे।

मौजूदा समय में विश्वविद्यालय, बरेली कॉलेज, अवंती बाई कॉलेज समेत अन्य महाविद्यालयों में प्रवेश प्रक्रिया चल रही है। प्रवेश के तहत ही विद्यार्थियों का आवागमन हो रहा है। विश्वविद्यालय में विद्यार्थी प्रवेश संबंधी कई प्रमाण पत्र भी लेने पहुंच रहे हैं और परिणाम संबंधी समस्याओं को लेकर भी पहुंच रहे हैं। देखने में आया है कि अभी तक कोरोना नियमों का पालन नहीं हो रहा है। कहीं भी न तो छह फीट की दूरी का पालन हो रहा है और न ही लोग मास्क लगा रहे हैं। बरेली कॉलेज में तो कहीं भी थर्मल स्क्रीनिंग भी नहीं हो रही है।

ये हैं बड़ी चुनौतियां
कक्षाएं लगाना- बड़े महाविद्यालयों में काफी संख्या में विद्यार्थी आते हैं। सभी की कक्षाएं विद्यार्थियों से भरी रहती हैं। ऐसे में 50 फीसदी विद्यार्थियों को ही बुलाया जा सकता है लेकिन किस तरह से विद्यार्थियों को बुलाना है, यह सबसे बड़ी चुनौती है।

ऑनलाइन पढ़ाई- शासन का निर्देश है कि 50 फीसदी कक्षाएं लगाकर पढ़ाई करायी जाए। साथ ही ऑनलाइन पढ़ाई पर ज्यादा जोर देना चाहिए। ऑनलाइन पढ़ाई कराना आसान नहीं है क्योंकि सभी छात्रों के मोबाइल नंबर अध्यापक के पास होना, नंबरों को किसी व्हाट्सएप या अन्य ग्रुप में जोड़ना, छात्रों के पास फोन है कि नहीं, जिस एरिया में वे रहते हैं वहां नेटवर्क है कि नहीं, अन्य तरीके से किस तरह से ऑनलाइन क्लास लगानी है, ये सब चुनौतियां हैं।

“भौतिक कक्षाएं किस तरह से शुरू की जाएंगी, इस संबंध में 20 नवंबर को बैठक की जाएगी। सभी अधिकारियों से सुझाव के बाद रोस्टर तय किया जाएगा। ऑड एंड ईवन सिस्टम के तहत छात्रों को बुलाकर भी कक्षाएं चलाने पर विचार किया जा रहा है।” -डा. अनुराग मोहन, प्राचार्य बरेली कॉलेज

“शासन के आदेशानुसार विश्वविद्यालय व महाविद्यालयों में कक्षाएं संचालित की जाएंगी। पाठ्यक्रम को किस तरह से पूरा कराना है, इसके लिए कितनी ऑनलाइन पढ़ाई हुई है। सत्र का कितना समय बचा है। इन सब पर विचार करने के बाद ही कोई निर्णय लिया जाएगा।” -प्रो. केपी सिंह, कुलपति रुहेलखंड विश्वविद्यालय

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