बरेली: उम्मीद में गुजरे 36 साल, इफको में नौकरी की ‘आस’ में 950 किसान
बरेली,अमृत विचार। ‘उम्मीद’ एक ऐसा शब्द है जिसके सहारे इंसान पूरी जिंदगी गुजार देता है। इसी उम्मीद से बंधे हैं ग्राम सेंथा के किसान। इफको फैक्ट्री स्थापित हुये 36 वर्ष बीत गये लेकिन 950 किसानों ने फैक्ट्री में नौकरी पाने की ‘आस’ आज तक नहीं छोड़ी है। राज्य में सपा, बसपा और भाजपा की सरकारें …
बरेली,अमृत विचार। ‘उम्मीद’ एक ऐसा शब्द है जिसके सहारे इंसान पूरी जिंदगी गुजार देता है। इसी उम्मीद से बंधे हैं ग्राम सेंथा के किसान। इफको फैक्ट्री स्थापित हुये 36 वर्ष बीत गये लेकिन 950 किसानों ने फैक्ट्री में नौकरी पाने की ‘आस’ आज तक नहीं छोड़ी है। राज्य में सपा, बसपा और भाजपा की सरकारें रहीं। हर सरकार से सेंथा के किसानों ने नौकरी दिलाने की गुहार लगायी लेकिन उनकी मांग संबंधी प्रार्थना पत्र हर बार रद्दी की टोकरी में कूड़े की तरह डाल दिया जाता है।
पिछले साल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से सेंथा के किसान व्यक्तिगत तौर पर मिले और उन्हें अपनी पीड़ा बताते हुये इफको में नौकरी दिलाने की गुहार लगाते हुये प्रार्थना पत्र सौंपा। 2 दिसंबर, 2019 को लखनऊ में सीएम के जनता दर्शन में सौंपे गये प्रार्थना पत्र पर आज तक कोई भी ठोस कार्रवाई नहीं हुई जबकि मुख्यमंत्री के विशेष कार्याधिकारी एनकेएस चौहान ने डीएम बरेली को यथोचित कार्रवाई करने के निर्देश दिये थे। उस बात को सालभर होने को है। एक साल में महज 14 दिन शेष हैं लेकिन किसानों का दर्द किसी स्तर पर नहीं समझा गया।
शासन स्तर पर मामला कई बार उठा। यहां तक मुख्यमंत्री संदर्भ, समाधान पोर्टल पर समन्वित शिकायत निवारण प्रणाली (आईजीआरएस) पर भी शिकायत की गयी। इसके भौतिक सत्यापन के निर्देश हुये। डीएम के निर्देश पर अपर जिलाधिकारी प्रशासन वीके सिंह ने एसडीएम आंवला कमलेश कुमार, तहसीलदार और नायब तहसीलदार को जिम्मेदारी सौंपी। 11 नवंबर, 2020 को तीनों अधिकारियों ने अपनी जांच आख्या अपर जिलाधिकारी प्रशासन को भेजी जिसमें कहा कि फैक्ट्री दशकों पूर्व बनी। उसी समय किसानों को मुआवजा व नौकरी दी गयी। किसान बार-बार अनावश्यक रूप से प्रार्थना पत्र देते रहते हैं। प्रकरण में कार्रवाई करना संभव नहीं है।
वर्ष 1984 में 1132 किसानों की भूमि हुई थी अधिग्रहीत
ग्राम सेंथा, पोस्ट मोहम्मदपुर पथरा, विकास खंड आलमपुर जाफराबाद (आंवला) ने सीएम को सौंपे गए प्रार्थना पत्र में कहा था कि वर्ष 1984 में इफको प्रोजेक्ट के तहत इकाई लगाने के लिये 1132 किसानों की भूमि का अधिग्रहण किया गया था। यूपी के तत्कालीन मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी ने घोषणा की थी कि जिस किसान की भूमि का अधिग्रहण किया गया है उसे मुआवजा के अलावा इफको फैक्ट्री में स्थायी नौकरी भी मिलेगी। इफको फैक्ट्री स्थापित होने के बाद 180 किसानों को नौकरी मिली भी थी लेकिन 950 किसानों को नौकरी नहीं दी गयी। तब से आज तक वे भटक रहे हैं। भूमि अधिग्रहण होने के बाद उनके पास रोजगार के साधन भी नहीं हैं। नौकरी न देकर किसानों का शोषण और अधिकारों का हनन हुआ है।
आईजीआरएस पर यह जवाब लिखा था
मुख्यमंत्री के विशेष कार्याधिकारी एनकेएस चौहान ने समाधान पोर्टल पर समन्वित शिकायत निवारण प्रणाली (आईजीआरएस) पर शिकायत अपलोड करते हुये डीएम बरेली को निस्तारित करने के निर्देश जारी किये थे। 5 दिसंबर, 2019 को आईजीआरएस पर मामला दर्ज हुआ। डीएम ने 3 जनवरी, 2020 को आंवला उप जिलाधिकारी को निस्तारित करने के निर्देश दिये। इसके बाद आईजीआरएस पर आख्या अपलोड करते हुये यह बताया गया कि आवेदक द्वारा भूमि अध्याप्ति लैंड लूजर होने पर इफको आंवला में स्थायी नौकरी दिलाने की मांग की गयी। नियम के अनुसार कार्रवाई कराने के लिये प्रार्थना पत्र इफको महाप्रबंधक कार्मिक एवं प्रशासनिक को भेज दिया है। तहसील स्तर से कार्रवाई संभव नहीं है।
