हाईकोर्ट: किसी धर्म विशेष से जुड़ी राजनीतिक पार्टी का अपमान करना धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के बराबर नहीं
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने से संबंधित एक मामले में सुनवाई करते हुए कहा कि अगर कोई व्यक्ति अनजाने में लापरवाही से या धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के किसी जानबूझकर या दुर्भावनापूर्ण इरादे के बिना किसी धर्म का अपमान करता है तो इसमें आईपीसी की धारा 295-ए के प्रावधान लागू नहीं होंगे।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी विशेष राजनीतिक दल या समूह का अपमान करना, जो किसी धर्म या उसकी आस्था से जुड़ा हुआ नहीं है, ऐसे में भी आईपीसी की उक्त धारा लागू नहीं होगी, क्योंकि राजनीतिक समूह का अपमान करना किसी वर्ग विशेष की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के बराबर नहीं माना जाएगा।
उक्त आदेश न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की एकलपीठ ने फराहिम कुरैशी की याचिका को स्वीकार करते हुए पारित किया और याची के खिलाफ आईपीसी की उपरोक्त धारा के तहत दर्ज आपराधिक कार्यवाही और संज्ञान आदेश को रद्द कर दिया। याची पर आरोप था कि उसने वर्ष 2019 के पुलवामा हमले से संबंधित एक संदेश सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए अप्रत्यक्ष रूप से भाजपा पर तंज कसा था।
हालांकि बाद में याची और विपक्षी के बीच विवाद सुलझ गया, इसलिए मामले को रद्द करने के लिए वर्तमान याचिका दाखिल की गई। याचिका में तर्क दिया गया कि मामला गुण-दोष के आधार पर रद्द किए जाने योग्य है, क्योंकि कथित पोस्ट में ऐसा कुछ भी नहीं था, जिससे प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से किसी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचे।
अंत में कोर्ट ने निष्कर्ष निकाला कि अगर याची द्वारा बोले या लिखे गए शब्दों या किसी अन्य तरीके से यह प्रतीत नहीं होता है कि इसका उद्देश्य धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का था, बल्कि उसका रवैया किसी ऐसी राजनीतिक पार्टी के प्रति हमलावर होता है, जो किसी विशेष धर्म से जुड़ी हुई नहीं है, तो आईपीसी की धारा 295-ए के तहत अपराध मान्य नहीं होगा।
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