प्रयागराज : तलाक लिए बिना अन्य पुरुष के साथ रह रही महिला को बच्चे की कस्टडी देने से किया इनकार
अमृत विचार, प्रयागराज : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक नाबालिग बच्चे की कस्टडी उसकी मां को ना देकर पिता को सौंपते हुए कहा कि एक गौरवशाली देश के उभरते नागरिक के भविष्य की देखभाल की जिम्मेदारी ऐसी मां को नहीं दी जा सकती है, जो कानून का उचित सहारा लिए बिना अपने पति को छोड़कर किसी अन्य व्यक्ति के साथ भाग गई।
उक्त आदेश न्यायमूर्ति सौरभ श्रीवास्तव की एकलपीठ ने जागृति और दो अन्य की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए पारित किया। साथ ही उप निरीक्षक, आगरा को निर्देश दिया कि वह याची संख्या दो यानी यश कुमार की कस्टडी उसके पिता याची संख्या तीन यानी सूरज कुमार को सौंप दी जाए और पिता की पहचान उनके अधिवक्ता द्वारा सत्यापित करवाई जाए।
दरअसल पिता द्वारा अपनी पत्नी और बेटे की कस्टडी की मांग करते हुए वर्तमान याचिका दाखिल की गई। जिसमें उसका दावा था कि उसकी पत्नी और बेटे को विपक्षी द्वारा अवैध रूप से हिरासत में रखा गया था, जबकि कोर्ट के समक्ष पत्नी ने बताया कि वह और उसका बच्चा अपनी मर्जी से विपक्षी के साथ रह रहे हैं। अंत में कोर्ट ने पक्षकारों के अधिवक्ताओं द्वारा दिए गए तर्कों के आधार पर निष्कर्ष निकाला कि काल्पनिक और आकर्षक संस्कृति के मोह में फंसी हुई महिला के सहारे परिवार की निधि रूपी बच्चे के भविष्य को अधर में नहीं डाला जा सकता।
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