सुखद संकेत

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Edited By Amrit Vichar
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अफवाहों और शंकाओं के विपरीत अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति जो बिडेन ने भारत से बेहतर रिश्ते बनाने के लिए हाथ बढ़ाया है। उन्होंने राष्ट्रपति निर्वाचित होने के बाद पहली बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर वार्ता करके कहा कि वह भारत के साथ मिलकर वैश्विक चुनौतियों का मुकाबला करेंगे। जो बिडेन की यह पहल …

अफवाहों और शंकाओं के विपरीत अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति जो बिडेन ने भारत से बेहतर रिश्ते बनाने के लिए हाथ बढ़ाया है। उन्होंने राष्ट्रपति निर्वाचित होने के बाद पहली बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर वार्ता करके कहा कि वह भारत के साथ मिलकर वैश्विक चुनौतियों का मुकाबला करेंगे। जो बिडेन की यह पहल अपने देश के लिए सुखद संकेत है। अमेरिका के मौजूदा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के समय में भारत और अमेरिका के रिश्ते बेहद मधुर रहे। चूंकि बिडेन ट्रंप को हराकर राष्ट्रपति का चुनाव जीते हैं इसलिए अफवाहों के बीच आशंकाएं पनपने लगी थीं कि बिडेन ट्रंप की विचाराधारा के विरोधी होने की वजह से भारत के प्रति उतने बेहतर रिश्ते नहीं रखेंगे।

इन आशंकाओं को पाकिस्तानी मीडिया भी हवा दे रहा था। खबरें उड़ाई गईं कि बिडेन ने कश्मीर में 370 के मसले पर भारत के निर्णय पर विरोध में प्रतिक्रिया दी थी। यह भी खबरें थीं कि बिडेन को पाकिस्तान ने अपने सर्वोच्च सम्मान से नवाजा था इसलिए वह पाकिस्तान के प्रति लचर रुख अपनाएंगे। हालांकि जानकार और विशेषज्ञ ऐसी संभावनाओं को शुरू से ही खारिज करते आ रहे थे। उनका अनुमान अब सही साबित हुआ है। बिडेन ने जिस तरह से भारत से बेहतर रिश्ते बनाने की पहल की है उससे साबित होता है कि भारत और अमेरिका दोनों देश मिलकर वैश्विक चुनौतियों से मिलकर मुकाबला करेंगे। इनमें कोविड-19, हिंद-प्रशांत और जनवायु परिवर्तन जैसे मुद्दे अहम हैं।

असल में भारत जिस तेजी से उभरती शक्ति बन रहा है उससे अमेरिका को भी लगता है कि उसके साथ मिलकर कई वैश्विक समस्याओं का समाधान तलाशा जा सकता है। इसमें कोई दोराय नहीं कि विगत वर्षों में रक्षा और विदेश नीतियों पर भारत ने मजबूती का प्रदर्शन किया है। आतंकवाद से निपटने के लिए भारत ने कई कड़े फैसले लिए हैं। जम्मू-कश्मीर में धारा 370 का मसला भी इसी की एक कड़ी है। कश्मीर लंबे समय से पाक समर्थित आतंकवाद से जूझ रहा है। पाकिस्तान की नापाक हरकतें किसी से छुपी नहीं हैं। अमेरिका भी आतंकवादी गतिविधियों से जूझता रहा है। ऐसे में, आतंकवाद से लड़ना दोनों देशों को ही है, इसलिए साझा लड़ाई आतंकवाद को कुचलने में कारगर होगी। यह बात अमेरिका को खूब समझ आ रही है।

कोविड-19 की वैक्सीन को विकसित करने में जिस तरह से भारत अग्रणी भूमिका निभाने की दिशा में अग्रसर है वह भी अमेरिका और पूरे विश्व के लिए लाभप्रद है। चीन और अमेरिका में कई मुद्दों पर टकराव है और भारत-चीन में भी इसलिए दोनों को हाथ मिलाने से परहेज नहीं कभी पहले रहा है और न कभी आगे रहेगा इसलिए उम्मीद की जा सकती है कि बिडेन के वक्त में भी दोनों देशों में संबंध मधुर ही रहेंगे।