Prayagraj News : बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर कोर्ट ने की संवेदनापूर्ण टिप्पणी
प्रयागराज, अमृत विचार : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बच्चों की अभिरक्षा हेतु एक मां द्वारा दाखिल बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई के दौरान संवेदनापूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि न्यायालय परिवार के लिए ईश्वर से प्रार्थना करता है कि वह अपनी अंतिम सांस तक एक साथ रहे। इसी के साथ कोर्ट ने परिवार के पुनर्मिलन के परिणाम के आधार पर मामले को निर्णय के लिए 28 अप्रैल 2025 के लिए स्थगित कर दिया।
उक्त टिप्पणी न्यायमूर्ति सौरभ श्रीवास्तव की एकलपीठ ने मास्टर नायब रजा और दो अन्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए की। दरअसल पत्नी ने अपने पति और परिवार के सदस्यों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कराया था, लेकिन पति और पत्नी द्वारा अपने बच्चों के साथ शांतिपूर्वक रहने के लिए सहमति देने पर कोर्ट ने आपराधिक कार्यवाही पर सुनवाई को स्थगित कर दिया।
मामले के अनुसार मां ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका में दावा किया था कि उसके पति ने उसके नाबालिग बेटे और बेटी को अवैध रूप से हिरासत में रखा है। सुनवाई के दौरान कोर्ट के आदेश पर पति ने कोर्ट में उपस्थित होकर पत्नी को अपने घर में रखने की इच्छा जताई। इस पर बच्चों की मां ने भी सकारात्मक प्रतिक्रिया दी, जिस पर बच्चों के भविष्य को देखते हुए कोर्ट ने परिवार की एकता और अखंडता की और भविष्य में उनके पारिवारिक और वैवाहिक विवाद के सुलझ जाने की संभावना जताई।
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