संपादकीय: निगाहें आरबीआई पर
केंद्रीय बजट में 12लाख तक की आय कर मुक्त होने के बाद मध्यम वर्ग की उम्मीद भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) से लगी है। शहरी मध्यम वर्ग और उद्योग जगत की ओर से ब्याज दर में कटौती की मांग की जा रही है। शुक्रवार को आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक हो रही है। दिसंबर 2024 में शक्तिकांत दास के बाद संजय मल्होत्रा के आरबीआई गवर्नर का पद संभालने के बाद यह एमपीसी की पहली बैठक होगी।
एक रिपोर्ट में कहा गया है कि तरलता बढ़ाने के उपायों के साथ, आरबीआई ने एमपीसी द्वारा ब्याज दरों में कटौती के लिए आधार तैयार कर लिया है। यानी ब्याज दरों में हल्की कटौती के लिए आधार तैयार हो गया है। ब्याज दरों में कटौती की संभावना इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि हाल ही में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक साक्षात्कार में कहा है कि रेट कट के फैसले पर आरबीआई अपना फैसला लेने के लिए पूरी तरह से स्वतंत्र है। वहीं, रिजर्व बैंक भी ये मानने लगा है कि सिस्टम में ज्यादा नकदी की जरूरत है। ऐसे में रेपो रेट में इस बार एक चौथाई फीसदी की कटौती की जा सकती है। रिजर्व बैंक ने फरवरी 2023 के बाद रेपो रेट में कोई कटौती नहीं की है।
गौरतलब है कि मंहगाई बढ़ने और ग्रोथ रेट घटने के लिए सिर्फ सरकार नहीं बल्कि आरबीआई भी जिम्मेदार है। उम्मीद की जा रही है कि रिज़र्व बैंक ब्याज दरों में 0.25 फीसदी की कटौती कर सकता है। अगर आरबीआई रेपो रेट में कटौती कर ब्याज दरों को घटाता है, तो मध्यम वर्ग को खुशी मिलेगी। ब्याज दर घटने से खपत बढ़ेगी। शेयर बाज़ार में भी तेज़ी आएगी। विश्लेषकों के मुताबिक एक तरफ महंगाई काबू में नहीं आ रही है और दूसरी तरफ़ ग्रोथ कम हो रही है। जीडीपी कम का मतलब है कि लोगों की आमदनी नहीं बढ़ रही है। महंगाई तेजी से बढ़ रही है।
ऐसे में कंपनियों का माल बिक नहीं पा रहा हैं। लोग चीजें खरीदने से कतरा रहे हैं। टैक्स कटौती के बाद इस बात की उम्मीद जगी है कि लोगों के खर्च करने की क्षमता बढ़ेगी। लोगों के हाथ में अधिक पैसे बचेंगे, जिससे खर्च करने की क्षमता बढ़ेगी। कुल मिलाकर शहरी मध्यम वर्ग खाद्य मुद्रास्फीति से राहत की उम्मीद कर रहा है। अब बजट में आयकर में की गई कटौती के बाद इस मोर्चे पर सभी की निगाहें आरबीआई की ओर लगींं हैं। देखना होगा कि वह लोगोंं की उम्मीद पर कितना खरा उतरता है।
