नैनीताल के ऐतिहासिक रैमजे अस्पताल की हालत खराब
अमृत विचार नैनीताल। अंग्रेजी दौर के बेहतरीन अस्पतालों में शुमार ऐतिहासिक रैमजे अस्पताल का आज हाल बुरा है। अस्पताल में जहां डॉक्टरों और अन्य स्टाफ का टोटा है वहीं समय के अनुसार अस्पताल में नई चिकित्सा सुविधाएं नहीं आने से अस्पताल की प्रासंगिकता लगातार घटती चली गई। जनता को आज इस अस्पताल का कोई लाभ …
अमृत विचार नैनीताल। अंग्रेजी दौर के बेहतरीन अस्पतालों में शुमार ऐतिहासिक रैमजे अस्पताल का आज हाल बुरा है। अस्पताल में जहां डॉक्टरों और अन्य स्टाफ का टोटा है वहीं समय के अनुसार अस्पताल में नई चिकित्सा सुविधाएं नहीं आने से अस्पताल की प्रासंगिकता लगातार घटती चली गई। जनता को आज इस अस्पताल का कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है।
अंग्रेजों के जमाने का यह अस्पताल ब्रिटिशकाल में अलग साख रखता था। उत्तर भारत के कोने-कोने से लोग अस्पताल में इलाज कराने आते थे। कुशल चिकित्सक और बेहतरीन उपचार ने इस अस्पताल को देश के प्रमुख अस्पतालों में खड़ा कर दिया। अस्पताल की ये साख अस्सी के दशक तक बरकरार थी। मगर पिछले चार दशक इस अस्पताल का हाल बुरा है। इस दौरान अस्पताल की हालात दयनीय होती चली गई। अब हालत यह है कि पड़ोस के लोग भी इलाज के लिए इस अस्पताल में जाना पसंद नहीं करते।
रैमजे अस्पताल की दर्दशा करने में स्वास्थ्य विभाग कम जिम्मेदार नहीं। आलम यह है कि सीएमओ ने इस अस्पताल के भीतर अपने कार्यालय का दायरा बड़ा लिया है। जिस कारण लोगों में खासा रोष है। रैमजे परिसर में ही मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय है। सीएमओ जैसे जिम्मेदार अधिकारी के नजदीक होने के बावजूद इस अस्पताल का हाल बुरा है। चिकित्सक, नर्स और अन्य कर्मचारियों की कमी के साथ ही अस्पताल में सुविधाओं का भी अभाव बना हुआ है।
अस्पताल बचाने में जुटे समाजसेवी महेश अधिकारी
रैमजे अस्पताल को बचाने के लिए स्थानीय लोगों ने मुहिम छेड़ी है। इस मुहिम का नेतृत्व समाजसेवी महेश अधिकारी कर कर रहे हैं। वह कहते हैं कि 23 एकड़ में फैले इस अस्पताल के प्रति विभाग जरा भी जिम्मेदारी निभाता तो इसकी ऐसी हालात नहीं होते। उन्होंने सैंकड़ों लोगों को हस्ताक्षर अभियान से जोड़ा है और अब अस्पताल को बचाने के लिए दूसरी रणनीति भी तैयार करने में लगे हैं। हालांकि हाल ही मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने रैमजे को पीपीपी मोड पर संचालित करने की घोषणा की है। लेकिन संशय बना हुआ है कि भविष्य में अस्पताल की व्यवस्था में कोई सुधार होगा या नहीं।
