लोहिया संस्थान में 72 लाख रुपए का हुआ गबन, ओपीडी पंजीकरण के घोटाले में कई अफसरों पर गिरेगी! 

Amrit Vichar Network
Edited By Muskan Dixit
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2022 में आउटसोर्सिंग कर्मियों पर कार्रवाई की हुई थी खानापूरी

लखनऊ, अमृत विचार: डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में वर्ष 2022 की ओपीडी पंजीकरण के नाम पर हुए लाखों रुपये के घोटाले में अब संस्थान के अफसरों की गर्दन फंसती दिख रही है। संस्थान के आला अफसरों ने सुदर्शन कंपनी के जरिए लोहिया के कैश काउंटर पर कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों को फंसाकर जेल तक भिजवा दिया। अब आरोपितों के वकील ने आरटीआई के तहत प्राप्त की आंतरिक लेखा एवं लेखा परीक्षा विभाग उप्र. के निदेशक की ऑडिट रिपोर्ट विभूतिखंड थाने के जांच अधिकारी को सौंपी तो इसका खुलासा हुआ। वकील का दावा है कि ऑडिट रिपोर्ट में पहले ही आरोपितों को दोष मुक्त करार दे दिया गया था, लेकिन इस रिपोर्ट को दबा दिया गया था।

72 लाख रुपये का हुआ था तीन साल पहले गबन

लोहिया संस्थान में वर्ष 2022 की ओपीडी पंजीकरण के दौरान रोगी यूजर चार्जेज की धनराशि में बरती गई अनियमितता एवं किए गए गबन की वित्तीय वर्ष 2016-17 से 2021-22 तक के लेखा अभिलेखों की विशेष सम्परीक्षा आंतरिक लेखा एवं लेखा परीक्षा उप्र. की निदेशक साधना श्रीवास्तव के स्तर से जांच हुई। इस गहन जांच की मार्च 2023 में उन्होंने पांच बिंदुओं में रिपोर्ट दी थी। इसमें पांचवें नंबर पर स्पष्ट किया गया था कि गबन की एफआईआर में आरोपियों के गलत नामों का उल्लेख किया जाना तथा एफआईआर पर अग्रिम कार्यवाही हेतु पत्राचार एवं प्रभारी पैरवी न किया जाना था। साथ ही चौथे बिंदु पर एचआईएस सॉफ्टवेयर में व्यवस्था न होने के कारण बैंक द्वारा ट्रांजेक्शन चार्जेज संस्थान से वसूलकर धनराशि 72 लाख 21 हजार 808 के राजस्व की हानि किया जाना कहा था। संस्थान द्वारा योजित चार्टेड अकाउंटेंट फर्म द्वारा 2016-17 से 2021-22 तक बैंक समाधान विवरण तथा वर्ष 2019-20 से संस्थान की बैलेंसशीट न बनाया जाना तीसरे बिंदु पर स्पष्ट किया था।

आरटीआई से हुआ खुलासा

चार आरोपियों में से दो आरोपी कर्मचारी विवेक कुमार सिंह को 11-12-2024 और आकाश अस्तीवाल 12-01-2025 को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। वकील अनिकेत श्रीवास्तव व अनिल शर्मा का कहना है कि इससे आरोपियों के मौलिक अधिकारों का हनन हुआ है। यही नहीं सुदर्शन कंपनी की ओर से कोर्ट में यह भी कहा गया है कि चारों आरोपी कंप्यूटर ऑपरेटर के पद पर तैनात नहीं थे। आंतरिक लेखा विभाग की इस रिपोर्ट के लोहिया संस्थान के आला अफसरों ने अभी तक छुपाए रखा था। गबन में शामिल लोहिया संस्थान के तत्कालीन अफसरों को बचाने में अब इस रिपोर्ट के बाद मामले में नया मोड़ आ गया है। माना जा रहा है कि रिपोर्ट की पुष्टि होने पर जांच की दिशा में बड़े बदलाव के आसार हैं।

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