अयोध्या में लेखपाल ने कर दिया खेल: मृतकों को ही बना दिया सरकारी पैमाइश का गवाह, एसडीएम ने तहसीलदार को सौंपी जांच
सोहावल/अयोध्या, अमृत विचार। चकमार्ग और पशु शव निस्तारण भूमि को राजस्व विभाग की मिली भगत से कब्जा कर मकान बनाने की शिकायत पर जांच करने गए क्षेत्रीय लेखपाल ने खेल करते हुए न सिर्फ फर्जी रिपोर्ट बना कर पेश कर दी बल्कि पैमाइश के दौरान जो मौके के गवाह बनाए वह भी कई साल पहले मर चुके लोग निकले। शनिवार को इसकी शिकायत तहसील समाधान दिवस पर सामने आई तो सभी भौचक रह गए।
उप जिलाधिकारी ने पूरे प्रकरण की जांच और कार्रवाई के लिए नवागत तहसीलदार प्रदीप कुमार सिंह को सौंपा है। मामला तहसील क्षेत्र के गांव इब्राहिमपुर दिवली का है। आरोप है कि यहां आबादी की एक भूमि से लगी चकमार्ग की कुछ भूमि और इससे जुड़ी पशु शव निस्तारण की भूमि को राजस्व कर्मियों ने गांव के ही निवासी एक युवक को घर बनाने के लिए कब्जा करा दिया।
चकमार्ग का रास्ता बंद हुआ तो बीते जनवरी में गांव निवासी मंशाराम ने जिला अधिकारी से शिकायत कर पैमाइश की मांग किया। अपने द्वारा किए गए खेल पर पर्दा डालने के लिए जांचकर्ता लेखपाल ने न सिर्फ शिकायत को फर्जी ठहराया अपितु जो रिपोर्ट लगाई उसमे भी मौके के तीन गवाह मृतकों को बनाया जो बीते कई साल पहले मर चुके है।
इसकी जांच तत्कालीन तहसीलदार सुमित सिंह ने टीम बनाकर राजस्व निरीक्षक अरुण तिवारी को सौंपी तो चकमार्ग पर आंशिक कब्जा सामने आया लेकिन पशु शव निस्तारण भूमि और मृतक गवाहों की कोई जांच नहीं हुई। शनिवार को जब तहसील दिवस पर इसकी तीसरी बार शिकायत हुई तो उपजिला अधिकारी अभिषेक सिंह ने भी नाराजगी दिखाई और मामले की जांच और कार्रवाई के लिए तहसीलदार को शिकायत सौंपी है।
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