बाराबंकी: बढ़ा इंतजार, प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव के बाद मिलेगा नया जिलाध्यक्ष

बाराबंकी: बढ़ा इंतजार, प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव के बाद मिलेगा नया जिलाध्यक्ष

बाराबंकी, अमृत विचार। भारतीय जनता पार्टी ने प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव से पहले पार्टी संगठन में जिलास्तर पर बड़े बदलाव किए। रविवार को लगभग 70 जिला और महानगर अध्यक्षों की घोषणा की गई। लेकिन जिन 28 जिलों के अध्यक्ष और महानगर अध्यक्ष की घोषणा रोकी गई, उनमें बाराबंकी जिला सबसे अहम माना जा रहा।

ऐसे में जिलाध्यक्ष के दावेदार बीते दो दिनों से प्रदेश नेतृत्व के फोन का इंतजार करते रहे, लेकिन अंत समय में उनके अरमानों पर फिलहाल पानी फिर गया। क्योंकि यहां ज्यादा नामांकन और उम्मीदवारों की संख्या को देखते हुए अध्यक्ष के नाम का ऐलान ही नहीं किया गया। अब माना जा रहा है कि भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के चयन के बाद नया अध्यक्ष अपने हिसाब से बाराबंकी समेत अन्य 28 जिलों के अध्यक्ष का चयन करेगा।  

दरअसल, करीब दो महीने की माथापच्ची के बाद भाजपा के जिलाध्यक्षों की सूची तैयार की गई। पिछले साल शुरू हुई भाजपा संगठन की चुनाव प्रक्रिया में मंडल अध्यक्षों का चुनाव दिसंबर और जिलाध्यक्षों का चुनाव जनवरी के अंत तक कराने की समय सीमा तय की गई थी। लेकिन मंडल अध्यक्षों का चुनाव ही जनवरी में संपन्न हो पाया। उसके बाद जब जिलाध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया शुरू हुई, तो जिले में 27 कार्यकर्ताओं ने दावेदार ठोंक दी। 

इनमें वर्तमान जिलाध्यक्ष अरविंद मौर्या के साथ ही जिला उपाध्यक्ष प्रमोद तिवारी, भाजपा मीडिया प्रभारी विजय आनंद बाजपेई, पूर्व एमएलसी हरगोविंद सिंह, जिला महामंत्री संदीप गुप्ता और भुल्लन वर्मा के अलावा पूर्व जिला अध्यक्ष संतोष सिंह व अवधेश श्रीवास्तव की दावेदारी सबसे मजबूत मानी जा रही थी। यानी कहीं न कहीं 26 नेताओं की दावेदारी ने वर्तमान जिलाध्यक्ष अरविंद मौर्या का गणित बिगाड़ दिया।

ऐसे में किसी एक नाम की घोषणा के बाद जिले में पार्टी के अंदर गुटबादी, आपसी विवाद और राजनीतिक दबाव का खतरा प्रदेश नेतृत्व ने भी भांप लिया। गहन मंथन के बाद जब किसी एक नाम पर सहमति नहीं बन पाई, तो यहां के अध्यक्ष की घोषणा रोक दी गई।  

भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि जिलाध्यक्ष के नाम को लेकर लंबे समय से रस्साकशी चली आ रही है। पद के दावेदार लखनऊ से लेकर दिल्ली तक जोर आजमाइश में जुटे हैं। कुछ अपने चहेतों को जिलाध्यक्ष बनाने के लिए तो कुछ ने कुर्सी बचाने के लिए जोर लगाया। इसके अलावा स्थानीय स्तर पर भी उनके बीच धड़ेबाजी जारी है। जिले में आए पर्यवेक्षक के सामने भी ये नजारा देखने को मिला था। यह स्थिति अंत समय तक बनी रही। जिसको देखते हुए पार्टी ने रविवार को प्रदेश के 70 जनपदों में जिलाध्यक्षों के नाम की घोषणा तो कर दी। लेकिन जिन 20 जिलों के अध्यक्ष के नाम का ऐलान नहीं किया, उनमें बाराबंकी भी शामिल हो गया।

बाराबंकी पैनल में भेजे गए नामों में से किसी एक नाम पर सहमति न बन पाने की वजह से यह स्थिति पैदा हुई है। क्योंकि राजनीतिक लिहाज से भाजपा के लिए जिला काफी अहम है। साथ ही राजधानी से सटा होने की वजह से पार्टी नहीं चाहती कि यहां से कोई भी निगेटिव मैसेज आगे पास हो।

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