बरेली: नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत मूल्यांकन में होगा बदलाव
बरेली,अमृत विचार। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 रुहेलखंड विश्वविद्यालय में लागू की जा रही है। नई नीति के तहत विश्वविद्यालय के मूल्यांकन के तरीकों में बदलाव किया जाएगा। शासन द्वारा 17 बिंदुओं पर विश्वविद्यालय से मांगी गई रिपोर्ट पर कुलपति प्रो. केपी सिंह ने शिक्षा नीति को लेकर प्रशासनिक भवन में आयोजित बैठक में चर्चा …
बरेली,अमृत विचार। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 रुहेलखंड विश्वविद्यालय में लागू की जा रही है। नई नीति के तहत विश्वविद्यालय के मूल्यांकन के तरीकों में बदलाव किया जाएगा। शासन द्वारा 17 बिंदुओं पर विश्वविद्यालय से मांगी गई रिपोर्ट पर कुलपति प्रो. केपी सिंह ने शिक्षा नीति को लेकर प्रशासनिक भवन में आयोजित बैठक में चर्चा की। बैठक में कुलपति ने अब तक विश्वविद्यालय द्वारा किए गए प्रयासों के बारे में मौजूद सदस्यों को जानकारी दी।
महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय में 25 नवंबर को राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के संबंध में विश्वविद्यालय स्तर पर कार्ययोजना बनाने के लिए कुलपति की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में विश्वविद्यालय परिसर के सभी संकाय अध्यक्षों, बरेली कॉलेज के प्राचार्य, खंडेलवाल कॉलेज के प्राचार्य एवं विश्वविद्यालय की कुलसचिव डॉ. सुनीता पांडेय आदि उपस्थित रहे।
कुलपति ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के 17 बिंदुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। राज्यस्तरीय स्टीयरिंग कमेटी, उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा इन 17 बिंदुओं से उनकी आख्या प्रस्तुत करने के लिए भेजी गई है। कुलपति ने बताया कि रुहेलखंड विश्वविद्यालय ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू करना शुरू कर दिया है। कुछ महत्वपूर्ण निकाय जैसे डायरेक्ट्रेट इंटरनेशनल रिलेशंस, डायरेक्ट्रेट ऑफ रिसर्च, यूनिवर्सिटी इनोवेशन क्लब, इनक्यूबेशन सेंटर डायरेक्ट्रेट ऑफ इंडस्ट्रियल एंड कॉरपोरेट रिलेशन आदि का गठन किया जा चुका है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति की कार्यवाही हेतु बुधवार की बैठक में सभी प्राचार्यों एवं संकाय अध्यक्षों द्वारा महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए। स्टीयरिंग कमेटी के सभी 17 बिंदुओं पर विश्वविद्यालय द्वारा सदस्यों से महत्वपूर्ण सुझाव आमंत्रित किए गए हैं जिसे ई-मेल द्वारा भी कुलपति को भेज सकते हैं। उपयुक्त सुझावों को रुहेलखंड विश्वविद्यालय की तरफ से उत्तर प्रदेश सरकार को अनुशंसा हेतु भेजा जाएगा।
जर्मन, फ्रेंच भाषा की भी होगी पढ़ाई
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत पाठ्यक्रमों के नवीनीकरण एवं नए कोर्स खोलने, क्रेडिट बेस सीबीएस सिस्टम को भविष्य में अपनाने की विश्वविद्यालय की योजना है। पाठ्यक्रमों को पुनर्गठित कर उन्हें रोजगारपरक एवं उद्योगों के अनुकूल बनाया जा रहा है। एम. फिल कोर्स को बंद किया जा रहा है। डायरेक्ट्रेट ऑफ मल्टी लैंग्वेजेज का प्रस्ताव विश्वविद्यालय द्वारा भेजा गया है जिसमें जर्मन, मंडारिन, फ्रेंच, स्पेनिश आदि भाषाएं सिखाने का केंद्र बनाया जाएगा। इससे विद्यार्थियों को रोजगार मिलेगा। महिला सशक्तिकरण सेल की स्थापना, ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट सेल का पुनर्गठन, ऑनलाइन क्लासेस एवं ई-कंटेंट के विषय में राष्ट्रीय शिक्षा नीति की गाइडलाइन का पालन होगा।
विद्यार्थियों से लिया जाएगा फीडबैक
राष्ट्रीय शिक्षा नीति में एक बड़ा महत्वपूर्ण बिंदु मूल्यांकन के तरीकों में बदलाव को लेकर है। यह मूल्यांकन विद्यार्थियों, शिक्षकों और शैक्षिक संस्थानों, तीनों का ही होगा। शिक्षक का मूल्यांकन विद्यार्थियों के फीडबैक, अभिभावकों के सर्वे एवं एलुमिनाई सर्वे आदि से तय होगा। वहीं, विद्यार्थियों के फीडबैक उनके पठन-पाठन, कौशल विकास, व्यक्तित्व विकास एवं एक्स्ट्राकरिकुलर एक्टिविटी से होगा। पूर्व में गठित डायरेक्ट्रेट आफ इंडस्ट्रियल कॉरपोरेट अफेयर्स से बरेली और मुरादाबाद मंडल एवं अन्य जगहों के उद्योगों हेतु फिजिबिलिटी रिपोर्ट बनाने के लिए विद्यार्थियों और शिक्षकों का पैनल बनाया जाएगा।
शोध से संबंधित सहूलियत भी दी जाएगी
राष्ट्रीय शिक्षा नीति में दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए शैक्षिक सहायता और करियर काउंसलिंग का प्रावधान भी किया गया है। रिसर्च और इनोवेशन को राष्ट्रीय शिक्षा नीति में प्रमुखता दी गई है। शोधार्थी को शोध से संबंधित सभी सहूलियतें प्रदान की जाएंगी। शोध के अंतिम चरण में वायवा पूर्ण होने के बाद ही हार्डकॉपी में थीसिस जमा होगी। इसके पूर्व के सभी चरणों में सॉफ्ट कॉपी से कार्य पूर्ण किया जाएगा।
