हाईकोर्ट ने जारी किया ऐसा निर्देश जिसे जानकर आप मास्क पहनकर ही घर से निकलेंगे!
नई दिल्ली। देश में कोरोना से लगातार जंग जारी है। केंद्र सरकार समेत सभी राज्य सरकार इसके बचाव और उपाय के लिए लोगों को जागरूक करने में लगी हुई हैं। स्वयं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी देश की जनता को जब तक दवाई नहीं तब तक कोई ढिलाई नहीं का मूलमंत्र दे चुके हैं। कोरोना से …
नई दिल्ली। देश में कोरोना से लगातार जंग जारी है। केंद्र सरकार समेत सभी राज्य सरकार इसके बचाव और उपाय के लिए लोगों को जागरूक करने में लगी हुई हैं। स्वयं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी देश की जनता को जब तक दवाई नहीं तब तक कोई ढिलाई नहीं का मूलमंत्र दे चुके हैं। कोरोना से निपटने के लिए सरकार द्वारा लोगों से लगातार मास्क पहनने का अनुरोध किया जा रहा है। लेकिन फिर भी देश में ऐसे कई लोग हैं जो बिना मास्क ही सड़कों पर घूमते पाए जाते हैं।
हालांकि बिना मास्क के घूमने वालों के लिए सरकार ने जुर्माने का प्रावधान बनाया है लेकिन लगता है केवल जुर्माने से बात नहीं बनने वाली है। ऐसे में गुजरात हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को एक ऐसा निर्देश दिया है जिसका पालन होने के बाद शायद ही कोई व्यक्ति बिना मास्क के घर से बाहर निकले।
जानिए क्या है गुजरात हाईकोर्ट का निर्देश
मास्क लगाने के प्रति लोगों की लापरवाही देखते हुए गुजरात हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश देते हुए कहा है कि जो जो लोग मास्क नहीं पहनते हैं उनसे जुर्माना वसूलें और अगर तब भी नहीं सुधरते हैं तो उन्हें कोविड सेंटर में सेवा के लिए भेजा जाए।
हाईकोर्ट ने कहा कि जो भी लोग बिना मास्क के घूमते हैं उन्हें कोविड कम्युनिटी सेंटर में नॉन मेडिकल विभाग में 10-15 दिनों तक काम करने की जिम्मेदारी दी जाए। हाईकोर्ट ने तंज कसते हुए कहा कि अगर लोगों को कोविड कम्युनिटी सर्विस सेंटर में सेवा के लिए भेजेंगे तो वे सतर्क होकर दिनभर मास्क पहनेंगे। अदालत ने राज्य सरकार को कोरोना की स्थिति को लेकर जवाब देने का आदेश दिया।
दरअसल, गुजरात हाईकोर्ट में मास्क पर एक याचिका दायर की गई थी। याचिकाकार्ता ने कहा था कि लोग मास्क नहीं पहनते हैं, जिससे अहमदाबाद, राजकोट, सूरत, वडोदरा में जुर्माने की रकम बढ़ाकर 2000 की जाए राज्य के अन्य शहरों में जुर्माने की रकम 1000 रखी जाए। इसके अलावा जो लोग मास्क नहीं पहनते उन्हें कोविड कम्युनिटी सर्विस सेंटर में नॉन मेडिकल विभाग में काम करने के लिए भेजा जाए। एडवोकेट जनरल ने कहा कि ये अच्छे विचार हैं, लेकिन इसका संचालन करना असंभव है।
