बरेली: मोबाइल नंबर फीडिंग में हो गया खेल, बिचौलियों के दर्ज हो गए नंबर

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Edited By Amrit Vichar
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बरेली,अमृत विचार। किसानों की सहूलियत और गन्ना खरीद में पारदर्शिता को लेकर पर्ची वितरण में लागू की गई एसएमएस सुविधा में ही खेल हो गया। बिचौलियों ने किसानों के पास फोन नहीं उठाने का फायदा उठाकर अपना मोबाइल नंबर दर्ज करा दिया। अब वह इसका जमकर फायदा उठा रहे हैं। वहीं, दूसरी तरफ बड़ी संख्या …

बरेली,अमृत विचार। किसानों की सहूलियत और गन्ना खरीद में पारदर्शिता को लेकर पर्ची वितरण में लागू की गई एसएमएस सुविधा में ही खेल हो गया। बिचौलियों ने किसानों के पास फोन नहीं उठाने का फायदा उठाकर अपना मोबाइल नंबर दर्ज करा दिया। अब वह इसका जमकर फायदा उठा रहे हैं।

वहीं, दूसरी तरफ बड़ी संख्या में किसान गन्ने की पर्चियां नहीं मिलने की वजह से परेशान हैं। उनका गन्ना समय से नहीं बिक रहा और न ही उनके खेत समय से खाली होने के आसार दिख रहे हैं। किसानों का आरोप है कि केंद्रों पर दलाल और बिचौलियों के गन्ने की तौल आसानी से हो रही है। इतना ही नहीं उन्हें पर्चियां भी आसानी से उपलब्ध हो रही हैं। अफसर सब कुछ जानते हुए भी अनजान बने हैं।

जनपद में एक नवंबर से समस्त चीनी मिलों का संचालन शुरू हो चुका है। मिलों ने पेराई भी शुरू कर दी है। जिले की पांच चीनी मिलों फरीदपुर, बहेड़ी, मीरगंज, नवाबगंज और सेमीखेड़ा के 205 गन्ना क्रय केंद्र बनाए गए हैं। नियमानुसार सभी क्रय केंद्रों पर एक-एक पर्ची वितरक होना चाहिए।

पूर्व की व्यवस्था के तहत पर्ची वितरक किसानों के घरों में गन्ने की पर्चियां भिजवाते हैं। इसमें धांधली की शिकायतें शासन स्तर पर पहुंचती थीं। लिहाजा, पारदर्शिता के साथ किसानों का गन्ना समर्थन मूल्य पर बिके, इसे लेकर शासन ने पेपरलेस व्यवस्था खत्म कर एसएमएस से पर्ची जारी करने की योजना लागू की। इसके तहत पंजीकृत किसानों के मोबाइल नंबर पर संदेश भेजा रहा है। संदेश प्राप्त होने के बाद किसान नजदीकी केंद्र पर जाकर गन्ने की तौल करा सकते हैं मगर, कोरोना काल में परेशान किसानों की समस्या कम होती नहीं दिख रही।

सूत्रों की मानें तो पोर्टल पर बड़ी संख्या में दलालों और बिचौलियों के नंबर फीड कर दिए गए हैं। इसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है। आरोप है कि किसानों से ज्यादा दलाल गन्ने की पर्चियां हासिल कर रहे हैं। अधिकारी सब कुछ जानते हुए भी समस्या का समाधान करने में रुचि नहीं लेते। सूत्रों की मानें तो अफसर दलाल और बिचौलिए हर साल वितरकों से मिलकर यही खेल कराते हैं। इसमें उन्हें मोटा मुनाफा होता है जबकि किसान दफ्तरों के चक्कर लगाकर थक जाता है तो उसे अपना गन्ना कोल्हू पर सस्ते दामों में बेचना पड़ता है।

क्या कहते हैं गन्ना किसान
कचहरी स्थित गन्ना समिति पहुंचे भुता के आदेश प्रताप ने बताया कि सरकार भले ही सख्ती की बात करे लेकिन धान खरीद की तरह ही गन्ना क्रय केंद्रों पर भी बिचौलिए हावी हैं। वितरक गन्ने की तौल में किसानों को प्राथमिकता नहीं देते। डीसीओ कार्यालय के बाहर मिले सिसईया के किसान रामचंद्र ने बताया अभी तक एक भी गन्ने की पर्ची सही समय पर नहीं मिली है। गन्ने की पर्चियां यदि सही समय पर मिल जाएं तो बड़ी बात होती है।

57 लाख क्विंटल खरीदा जा चुका है गन्ना
जिले की समस्त चीनी मिलें 57 लाख क्विंटल के करीब गन्ना खरीद चुकी है। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक, इस पेराई सत्र में फरीदपुर स्थित द्वारिकेश चीनी मिल ने 14.61 लाख क्विंटल, बहेड़ी की केसर चीनी मिल ने 18.23 लाख क्विंटल, मीरगंज की डीएसएम चीनी मिल ने 11.31 लाख क्विंटल, नवाबगंज की ओसवाल चीनी मिल में 5.73 लाख क्विंटल और सेमीखेड़ा सहाकारी चीनी मिल ने किसानों से 7.71 लाख क्विंटल गन्ना खरीदा है।

“इस बार किसानों की सहूलियत और गन्ना खरीद में धांधली न हो, इसे लेकर पर्चियों का वितरण पेपरलेस तरीके से हो रहा है। किसानों के मोबाइल पर एसएमएस से जानकारी भेजी जा रही है। फिर भी कहीं कोई गड़बड़ी होती है तो संबंधित पर कार्रवाई की जाएगी। पिछले पेराई सत्र का बकाया भुगतान पूरा करने के साथ ही इस पेराई सत्र का भी चीनी मिलों द्वारा भुगतान किया जा रहा है।” -पीएन सिंह, जिला गन्ना अधिकारी

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