कुटीर और मझोले उद्योगों के ब्रांड एंबेसडर ‘धर्मपाल गुलाटी’ को नमन

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विभाजन की त्रासदी को पीछे छोड़ अपनी मेहनत से सफलता के नए मुकाम हासिल करने वाले जिन चंद नामों की हिंदुस्तान में विशेष चर्चा होती है, उनमें महत्वपूर्ण नाम है। धर्मपाल गुलाटी।27 मार्च 1923 को सियालकोट में महाशियान चमन लाल के घर में जन्म लेने वाले धर्मपाल गुलाटी के पिता का सियालकोट में “महाशियन दी …

विभाजन की त्रासदी को पीछे छोड़ अपनी मेहनत से सफलता के नए मुकाम हासिल करने वाले जिन चंद नामों की हिंदुस्तान में विशेष चर्चा होती है, उनमें महत्वपूर्ण नाम है। धर्मपाल गुलाटी।
27 मार्च 1923 को सियालकोट में महाशियान चमन लाल के घर में जन्म लेने वाले धर्मपाल गुलाटी के पिता का सियालकोट में “महाशियन दी हट्टी” नाम से मसाले और देगी मिर्च का स्थापित कारोबार था।

विभाजन की उस त्रासदी जिसमें तत्कालीन हिंदुस्तान की 20% आबादी इधर से उधर हो गई उसमें धर्मपाल गुलाटी भी मे जमाए कारोबार को छोड़ अपनी बहन के भरोसे मात्र 1500 रुपये लेकर करोल बाग दिल्ली आ गए।

यहां 650 रुपये में तांगा खरीदा खूब मेहनत कर दिन भर तांगा चलाय, लेकिन दिन में ही सफलता के चांद तारे छूने की तमन्ना रखने वाले धर्मपाल गुलाटी को तांगा चलाना रास नहीं आया। उन्होंने दो माह में हीअजमल खां रोड में एक छोटा सा मसाले का खोखा डाल दिया, नाम रखा महाशियान दी हट्टी सियालकोट वाले।

इस नाम की पाकिस्तान में खूब धूम थी। तब तक दिल्ली में 5 लाख की पाकिस्तान से आई आबादी बस चुकी थी। जिसने हाथों हाथ इन मसालों को लिया और इसे भारत का उभरता हुआ उद्योग एमडीएच बना दिया।

धर्मपाल गुलाटी ने ना कभी अपनी मूंछेंगिराई और ना मसालों की क्वालिटी। उनके इस समर्पण से ही एमडीएच भारत में एवरेस्ट के बाद नंबर दो कि मसाला कंपनी है। जिसकी इस कारोबार में 12% की हिस्सेदारी है। 100 से अधिक देशों में मसाले का निर्यात है। 150 फ्लेवर की अलग-अलग पैक में मसाले तैयार हैं।

2020 में भी मंदी के बाद भी कंपनी ने बढ़कर दो हजार करोड़ का कारोबार किया और नेट मुनाफा रहा 470 करोड़। धर्मपाल गुलाटी दुनिया के सबसे सीनियर एडवरटाइजर एक्टर थे। वह एडवरटाइजिंग और कंपनी में अपनी सेवाओं के बदले 25 करोड रुपए सालाना तनख्वाह प्राप्त कर रहे थे। जिसका 90% वह दान में खर्च करते थे। एमडीएच 4 स्कूल, एक 250 बेड का अस्पताल चला रहा है। हांलाकि गुलाटी खुद पांचवीं तक पढ़े थे।

मनमौजी स्वभाव के धर्मपाल गुलाटी हमेशा अपनी जड़ों से जुड़े रहे। आखरी दिन तक उन्होने मेहनत नहीं छोड़ी। भारत के बढ़ते हुए कुटीर और मझोले उद्योग के लिए वह हमेशा प्रेरणा स्रोत रहेंगे। नए भारत के निर्माण में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका को देश नजरअंदाज नहीं कर पाएगा। आज उनका महापरायण हो गया।

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