भमोरा के छात्र के आधार कार्ड पर जारी सिम चला रहा उत्तराखंड का तस्कर

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संजय शर्मा, बरेली। साइबर ठगों और तस्करों ने बायोमेट्रिक तरीके से खरीदे गए सिम कार्ड का भी तोड़ निकाल लिया है। इसके लिए उन्होंने सिम देने वाले कम्यूनिकेशन सेंटरों पर पहचान बना ली है। गांव और तहसीलों में सिम बेचने वाले कम्युनिकेशन सेंटर एक ही आधार पर दो दो सिम रिलीज करा लेते हैं और …

संजय शर्मा, बरेली। साइबर ठगों और तस्करों ने बायोमेट्रिक तरीके से खरीदे गए सिम कार्ड का भी तोड़ निकाल लिया है। इसके लिए उन्होंने सिम देने वाले कम्यूनिकेशन सेंटरों पर पहचान बना ली है। गांव और तहसीलों में सिम बेचने वाले कम्युनिकेशन सेंटर एक ही आधार पर दो दो सिम रिलीज करा लेते हैं और उन्हें तस्करों को बेच दिया जाता है। इसके लिए तस्कर उन्हें मोटा पैसा देते हैं। यह सिलसिला लंबे समय से चल रहा है।

भमोरा के कुडढ़ा निवासी हिमांशु शर्मा बीए की पढ़ाई कर रहे हैं। उन्होंने 29 नवंबर 2018 को गांव के पास के एक कम्युनिकेशन सेंटर से आधार कार्ड लगाकर बायोमेट्रिक करके एक सिम लिया था, लेकिन 24 घंटे बीत जाने के बाद भी उनका सिम सक्रिय नहीं हुआ। इसके बाद दुकानदार ने फिर से उनकी बायोमेट्रिक करके उन्हें नया सिम दे दिया जो दो घंटे बाद शुरू हो गया।

नेटवर्क में लगातार दिक्कत आने के बाद हिमांशु से उस नंबर को कुछ समय बाद बंद कर दिया। कुछ दिन पहले हिमांशु के पास एक लखनऊ के नारकोटिक्स विभाग से एक नोटिस पहुंचा और उन्हें लखनऊ बुलाया गया। जहां उन्हें बताया कि उनके आधार कार्ड और बायोमेट्रिक पर जो सिम 29 नवंबर 2018 को जारी किया गया था। उस नंबर को उत्तराखंड के उधम सिंह नगर का रहने वाला गड्डू चला रहा है, और वह नशीले पदार्थ की तस्करी से जुड़ा है।

अफसरों ने जब उससे पूछताछ की तो पता चला की हिमांशु का गड्डू से कोई कनेक्शन नहीं है। इसके बाद नारकोटिक्स टीम ने उसकी बात पर भरोसा करते हुए छोड़ दिया। लेकिन वह अपने नाम पर जारी किए गए मोबाइल नंबर को बंद कराने के लिए वह पुलिस अधिकारियों के चक्कर काट रहा है।

सिम लेते समय सावधानी रखें। दुकानदार गांव के लोगों को अपने जाल में फंसाकर उनके नाम पर सिम जारी करवा लेते हैं और फिर उसे तस्करों को दे देते है। पहले फार्म भरकर सिम जारी किए जाते थे तब यह धांधली ज्यादा थी लेकिन दुकानदारों ने बायोमेट्रिक में भी इसका जुगाड़ निकाल लिया है। -राजेश कुमार पांडेय, डीआईजी

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