गले मिलने से परहेज

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Edited By Amrit Vichar
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‘दो गज की दूरी और मास्क है जरूरी’ जैसे नारे के साथ कोरोना से बचाव के लिए लोगों को जागरूक किए जाने के बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने एक संदेश सावधानी को लेकर जारी किया है, वह है- ‘गले मिलने’ से परहेज। डब्ल्यूएचओ ने अपने इस संदेश में लोगों से आपस में गले मिलने …

‘दो गज की दूरी और मास्क है जरूरी’ जैसे नारे के साथ कोरोना से बचाव के लिए लोगों को जागरूक किए जाने के बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने एक संदेश सावधानी को लेकर जारी किया है, वह है- ‘गले मिलने’ से परहेज। डब्ल्यूएचओ ने अपने इस संदेश में लोगों से आपस में गले मिलने से परहेज करने को कहा है। यह भी कहा है कि छुट्टियों के दौरान सारे लोग विशेष सावधानी बरतें। क्या ‘गले मिलने’ को ‘करीबी संपर्क’ माना जा सकता है? इस सवाल पर डब्ल्यूएचओ ने कोरोना वायरस के लिहाज से उच्च जोखिम वाले देशों में लोगों के लिए ‘करीबी संपर्क’ से बचने का परामर्श जारी किया है। यह संदेश डब्ल्यूएचओ के आपात मामलों के प्रमुख डॉ. माइकल रेयान ने जारी किया है।

असल में डॉ. रेयान ने यह संदेश अमेरिका में लगातार बढ़ते कोविड-19 महामारी के संदर्भ में जारी किया गया। उन्होंने कहा है कि अमेरिका जैसे देश में बेहतरीन स्वास्थ्य प्रणाली और आधुनिक तकनीक है फिर भी वहां एक मिनट में संक्रमण से एक से दो लोगों की मौत होना चौंकाने वाली बात है। ऐसे में अन्य देशों में कोविड-19 के खतरे को लेकर अंदाजा लगा लेने की जरूरत है। डब्ल्यूएचओ की तकनीकी प्रमुख मारिया वान केरखोवे ने कहा कि संक्रमण के अधिकतर मामले साथ भोजन करने और साथ रहने के कारण हुए हैं। ऐसे में करीबी संपर्क को लेकर ज्यादा सतर्कता बरतने की जरूरत है।

गौरतलब है कि नवंबर माह में ब्रिटेन के मुख्य चिकित्सा अधिकारी क्रिस व्हिटी ने भी ब्रिटिश नागरिकों से कहा था कि अगर वे अपने बुजुर्ग प्रियजनों को जीवित और स्वस्थ देखना चाहते हैं और आगे उन्हें गले लगाना चाहते हैं तो इन छुट्टियों में उनसे गले मिलने और चूमने से परहेज करें। कोई दो-राय नहीं कि कोविड-19 इन दिनों दुनिया भर के लिए खतरा है इसलिए इससे बचाव को लेकर खास सतर्कता बरतने को कहा जा रहा है लेकिन अफसोस होता है कि इस महामारी के चलते हमें अपनों से भी दूर रहना पड़ रहा है। भारतीय संस्कृति में हाथ मिलाने के बजाय हाथ जोड़कर नमस्कार करने की परंपरा रही है।

ऐसे में, कोविड-19 के प्रारंभ में हाथ मिलाने से परहेज की बात सामने आई तो सबने नमस्कार के अभिवादन की परंपरा की सराहना की लेकिन हमारे यहां माता-पिता और बड़े बुजुर्ग बच्चों को गले लगाते हैं। इससे अपनत्व का अहसास होता है। ऐसे में गले मिलने से परहेज करने का डब्ल्यूएचओ का संदेश यह सोचने को भी विवश करता है कि हम उस घातक महामारी के दौर में हैं जिसने अपनत्व को भी हम सबसे दूर रहने को विवश कर दिया है।