विधानसभा में सवालों का जवाब देने की तय की गई गाइडलाइंस, 30 दिन में करना होगा विभागाध्यक्ष को तलब
लखनऊ, अमृत विचार: राज्य विधानसभा की नयी विधायी नियमावली के अनुसार अब प्रत्येक सूचना पर सम्बन्धित विभाग से उत्तर प्राप्त करना अनिवार्य कर दिया गया है। विभागों के लिए सवालों, सूचनाओं का जवाब देने के लिए पहले 90 दिन की समयावधि निर्धारित थी जिसे अब 30 दिन कर दिया गया है। इन तीस दिनों में विभागों को जवाब तैयार करने की बाध्यता होगी।
किसी भी विभाग से अगर निर्धारित समयावधि में जवाब नहीं मिलता है तो विधानसभा अध्यक्ष उक्त विभाग के प्रमुख को तलब कर उचित कार्रवाई भी कर सकते हैं। ऐसे में अब विभाग अधिक उत्तरदायी एवं सक्रिय हो गए हैं। विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना के अनुसार, मानसून सत्र के दौरान सत्ता और विपक्ष दोनों ने अपनी-अपनी बात खुलकर रखी। यही लोकतंत्र की वास्तविक खूबसूरती है। चार दिन के संक्षिप्त सत्र में जितना विधायी कार्य हुआ, उतना प्रायः लंबे सत्रों में भी नहीं हो पाता। कुल 32 घंटे 28 मिनट तक विधानसभा की कार्यवाही चली, जिसमें केवल 43 मिनट सदन स्थगित रहा।
इस प्रकार स्थगन रहित समयावधि 31 घंटे 45 मिनट रही, जो लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत है। महाना ने बताया कि, 29 मार्च 2022 को विधानसभा अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी ग्रहण करने के बाद से प्रत्येक सत्र में कुछ नया करने का प्रयास किया गया है। परम्पराओं, संचालन और प्रक्रिया- तीनों ही स्तरों पर निरंतर नवीनता लाने का कार्य हुआ है, ताकि विधानमंडल की गरिमा और लोकतंत्र की प्रतिष्ठा निरंतर समृद्ध होती रहे।
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