बरेली: आईवीआरआई ने वैश्विक स्तर पर कई महत्वपूर्ण कार्य किए- डा. महापात्रा

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अमृत विचार, बरेली। भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान ने जूम एप के माध्यम से बुधवार को वर्चुअल 131वां स्थापना दिवस मनाया। इस अवसर पर भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली के सचिव, डेयर एवं महानिदेशक त्रिलोचन महापात्रा ने पशुचिकित्सा दैहिकी एवं जलवायुकी विभाग के 50 वर्ष पूर्ण होने पर स्वर्ण जयंती तथा क्राफ्ट के 25 …

अमृत विचार, बरेली। भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान ने जूम एप के माध्यम से बुधवार को वर्चुअल 131वां स्थापना दिवस मनाया। इस अवसर पर भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली के सचिव, डेयर एवं महानिदेशक त्रिलोचन महापात्रा ने पशुचिकित्सा दैहिकी एवं जलवायुकी विभाग के 50 वर्ष पूर्ण होने पर स्वर्ण जयंती तथा क्राफ्ट के 25 वर्ष पूर्ण होने पर सिल्वर जुबली स्तम्भ का अनावरण किया। इस आनलाइन बैठक में संस्थान के एकेडमिक काउंसिल, शोध सलाहकार समिति सदस्य, पूर्व निदेशकों, वैज्ञानिक तथा पशु विज्ञान से जुड़े निदेशकगण आईवीआरआई एवं क्षेत्रीय परिसरों के संयुक्त निदेशकगण एवं प्रभारी, वैज्ञानिक, अधिकारियों समेत 290 से अधिक लोगों ने भाग लिया।

ऑनलाइन बैठक में निदेशक डा. महापात्रा ने संस्थान के स्थापना दिवस पर बधाई देते हुए कहा कि संस्थान ने पशुधन स्वास्थ्य, शिक्षा एवं शोध में वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण कार्य किया गया है। उन्होंने कहा कि यह समय है जब हम अपने पूर्व निदेशकों, वैज्ञानिकों, अधिकारियों तथा कर्मचारियों का अभिनंदन करें जिन्होंने संस्थान को ख्याति दिलाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने मुक्तेश्वर परिसर का उल्लेख करते हुए कहा कि संस्थान के वैज्ञानिकों ने संसाधनों के अभाव के बावजूद पशुओं की घातक बीमारियों के लिए शोध कर निदान तैयार किये। उन्होंने कहा कि पशुओं के लिए सबसे ज्यादा टीके आईवीआरआई ने विकसित किये हैं।

इस अवसर पर दैहिकी एवं जलवायुकी विभाग के 50 वर्ष पूरे होने पर विभागाध्यक्ष डा.जी. तरू शर्मा को बधाई दी गई। विशिष्ट अतिथि एवं उपमहानिदेशक पशु विज्ञान, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद डा. बी.एन. त्रिपाठी ने दैहिकी एवं जलवायुकी विभाग के 50 वर्ष पूर्ण होने पर बधाई देते हुए कहा कि विभाग ने शोध, शिक्षा, प्रशिक्षण आदि में महत्वपूर्ण योगदान कर कई पुरस्कार प्राप्त किये हैं।

संस्थान के कार्यवाहक निदेशक एवं कुलपति डा. बी.पी. मिश्रा ने सभी अतिथियों का आभार जताते हुए संस्थान के इतिहास पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि यह यात्रा पूना से प्रारम्भ हुयी तथा मुक्तेश्वर परिसर में सन् 1893 इम्पीरियल बैक्टीरियल लैबोरेटरी की स्थापना की गयी। साथ ही पशुओं की बीमारी रिण्डरपेस्ट, कैटल प्लेग, रानीखेत, एफ स्ट्रेन, शीप एंड गोट पाक्स, ब्रुसेल्ला, सीबीपीपी आदि बीमारियों के टीके तैयार किये। संस्थान ने कुल एक लाख साठ हजार कोविड के मानव नमूनों तथा वन्यजीव के 149 नमूनों का परीक्षण किया। संस्थान ने एम्ब्रयोट्रांसफर तकनीक विधि द्वारा सात बछड़ों/बछियाओं का जन्म हुआ है।

संस्थान द्वारा 27 तकनीकों का हस्तांतरण किया गया है। सात पेटेंट एवं पांच डिजाइन को स्वीकृति प्रदान की गई है। संस्थान के वैज्ञानिकों द्वारा कुल 370 शोध पत्र प्रकाशित किये गये हैं। संस्थान द्वारा आठ मोबाइल एप विकसित किये गये हैं जिन्हें गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड कर किसान लाभान्वित हो रहे हैं।

डा. मिश्रा ने कहा कि संस्थान क्षेत्रीय परिसर द्वारा आर्थिक रूप से पिछड़े किसानों के लिये कई कार्यक्रम चलाये गये हैं। स्थापना दिवस समारोह का संचालन निदेशक के वैयक्तिक सलाहकार डा. सत्यवीर सिंह मलिक द्वारा किया गया।

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