प्रयागराज : राहुल गांधी की पुनरीक्षण याचिका पर हाईकोर्ट में फैसला सुरक्षित
प्रयागराज, अमृत विचार। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कांग्रेस व विपक्ष के नेता राहुल गांधी की पुनरीक्षण याचिका पर बुधवार को सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया। यह याचिका वाराणसी अदालत के उस आदेश को चुनौती देती है, जिसमें अमेरिका यात्रा के दौरान सिखों पर कथित टिप्पणी को लेकर उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग पर मजिस्ट्रेट को पुनः सुनवाई का निर्देश दिया गया था। बता दें कि नागेश्वर मिश्रा नामक व्यक्ति ने वाराणसी अदालत में याचिका दाखिल कर गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की थी, जिसे मजिस्ट्रेट ने खारिज कर दिया था।
बाद में सत्र न्यायालय ने 21 जुलाई 2025 को मजिस्ट्रेट को मामले की पुनः सुनवाई का निर्देश दिया, इसके खिलाफ राहुल गांधी ने हाईकोर्ट में वर्तमान पुनरीक्षण याचिका दाखिल कर तर्क दिया कि वाराणसी अदालत का आदेश गलत, अवैध और क्षेत्राधिकार से बाहर है। मामले की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति समीर जैन की एकलपीठ ने स्पष्ट किया कि अंतिम निर्णय आने तक मजिस्ट्रेट अदालत आगे कार्रवाई न करे।
गांधी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल स्वरूप चतुर्वेदी ने कोर्ट को बताया कि उनके भाषण को गलत संदर्भ में प्रस्तुत किया गया और महज कुछ शब्दों के आधार पर उनकी नीयत पर सवाल नहीं उठाया जा सकता। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि यहां-वहां कहे गए एक-एक वाक्य पर विचार करना उचित नहीं है। केवल 25 शब्दों के आधार पर किसी के इरादे का पता नहीं लगाया जा सकता, जब तक पूरा भाषण कोर्ट के समक्ष ना हो। दूसरी ओर राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने कहा कि गांधी विपक्ष के नेता होने के नाते जिम्मेदार पद पर हैं और विदेश में दिए गए बयान विपक्ष की आधिकारिक आवाज माने जाते हैं। अतः मजिस्ट्रेट को स्वतंत्र रूप से यह तय करने दिया जाए कि प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध बनता है या नहीं।
