अर्थव्यवस्था को औषधि
कोविड-19 के दौरान लगाए गए लॉकडाउन के कारण सभी क्षेत्रों में गतिविधियां ठप हो गई थीं। बड़े पैमाने पर लोगों को नौकरियों से हाथ धोना पड़ा था। देश में बेरोजगारी ने सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए थे। विपक्षी दल भी सरकार पर रोजगार को लेकर निशाना साध रहे थे। ऐसे में, केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार …
कोविड-19 के दौरान लगाए गए लॉकडाउन के कारण सभी क्षेत्रों में गतिविधियां ठप हो गई थीं। बड़े पैमाने पर लोगों को नौकरियों से हाथ धोना पड़ा था। देश में बेरोजगारी ने सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए थे। विपक्षी दल भी सरकार पर रोजगार को लेकर निशाना साध रहे थे। ऐसे में, केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार की आत्मनिर्भर भारत रोजगार योजना काफी मददगार साबित होगी। कहा जा सकता है आत्मनिर्भर भारत रोजगार योजना को कैबिनेट से मंजूरी मिलना देश की लगातार गिरती अर्थव्यवस्था के लिए किसी औषधि से कम नहीं है।
योजना का लाभ 58.5 लाख कर्मचारियों को होगा। 23,000 करोड़ रुपए की इस योजना से कर्मचारी और रोजगार प्रदाताओं दोनों को प्रोत्साहन मिलेगा। कंपनियों में नई बहाली को बढ़ावा मिलेगा। योजना का पहला लाभ यह है कि यदि कंपनियां लॉकडाउन के दौरान नौकरी से निकाले गए कर्मचारियों को वापस लेती हैं तो उन्हें 12 से लेकर 24 प्रतिशत तक की ईपीएफओ की ओर से वेतन सब्सिडी दी जाएगी। योजना से दूसरा लाभ यह होगा कि उद्योग जगत को नई नियुक्तियों के लिए प्रोत्साहित किया जा सकेगा। इसका लाभ युवाओं को नई नौकरी के रूप में मिलेगा।
देश की अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए आरंभ की गई इस योजना में साफ दिख रहा है कि केंद्र की मोदी सरकार को कर्मचारियों के हितों की चिंता है। कोरोना काल में बेरोजगार हुए कर्मचारियों के लिए यह योजना निश्चित ही एक तोहफा जैसी होगी। ऐसी ही एक और योजना केंद्र का श्रम मंत्रालय शुरू करने जा रहा है- अटल बेमिसाल कल्याण योजना। इसमें छह माह से बेरोजगार श्रमिकों को लाभान्वित किया जाएगा।
हालांकि इसके बाद भी देश के लाखों श्रमिकों और कर्मचारियों को रोजगार के स्थायी बंदोबस्त की जरूरत रहेगी। कोरोना की मार से बंद हुए हजारों उद्योग-धंधों को फिर से चलाने के लिए सरकार ने वैसे तो राहत पैकेज की घोषणा की है लेकिन उसमें और तेजी लाए जाने की जरूरत है ताकि यह उद्योग-धंधे जल्द से जल्द शुरू हो जाएं और बेरोजगार बैठे श्रमिक फिर से काम शुरू कर सकें।
अभी भी अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए बहुत तेजी और दूरदर्शिता के साथ काम किए जाने की जरूरत है। इसमें दो राय नहीं कि केंद्र और राज्य सरकारें लगातार इस दिशा में काम कर रही हैं। इसके लिए नीतियां और योजनाएं बनाई जा रही हैं लेकिन इन योजनाओं का क्रियान्वयन जितनी तेजी और पारदर्शी ढंग से होगा, उतनी ही जल्दी श्रमिक वर्ग को राहत हासिल हो सकेगी और अर्थव्यवस्था भी पटरी पर जल्द लौट पाएगी।
