UP News: दो दशक बाद वोटर लिस्ट की बड़ी बारीकी से हो रही मॉनिटरिंग, जमीनी होमवर्क करने पर तमाम जिलों में मिली ढेरों खामियां

Amrit Vichar Network
Edited By Muskan Dixit
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लखनऊ, अमृत विचार: उत्तर प्रदेश में चुनाव आयोग लगभग दो दशक बाद वोटर लिस्ट की बड़ी बारीकी से मॉनिटरिंग कर रहा है। जमीनी होमवर्क करने पर तमाम जिलों में जैसी खामियां मिल रहीं हैं, उसको लेकर आयोग के अधिकारी भी हैरान हैं। दरअसल, मौजूदा अभियान के तहत 2003 की सूची और वर्तमान सूची का मिलान हो रहा है।

इस दौरान मतदाताओं की ड़ुप्लीकेसी तो पकड़ी ही जा रही है, वर्ष 2003 के बाद जिनके जुड़े हैं उन्हें भी आयोग के कहने पर अपनी पहचान संबधी आवश्यक दस्तावेज दिखाना होगा। इस स्क्रूटनी में नाम मतदाता सूची से हटाए जाने पर भी उनके अभिलेख सुरक्षित रखे जाएंगे ताकि भविष्य में आवश्यकतानुसार कानूनी औपचारिकताओं में इसका प्रयोग किया जा सके।

राज्य में पंचायत चुनाव और विधानसभा चुनाव से पहले वोटर लिस्ट को अपडेट और त्रुटिरहित बनाने के लिए अभियान चल रहा है। इसको लेकर जिला निर्वाचन अधिकारियों और निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

उत्तर प्रदेश में वोटर लिस्ट का गहन पुनरीक्षण साल 2003 में हुआ था। अब लगभग 22 साल बाद यह प्रक्रिया दोबारा शुरू होने जा रही है। इस दौरान 2003 की मतदाता सूची और वर्तमान मतदाता सूची का मिलान किया जाएगा। जिन मतदाताओं के नाम दोनों सूचियों में दर्ज हैं, उन्हें कोई अतिरिक्त दस्तावेज देने की जरूरत नहीं होगी। हालांकि, जिनके नाम बाद में जोड़े गए हैं, उन्हें आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे।

खासकर जिन बच्चों के नाम अभिभावकों के बाद जोड़े गए हैं, उन्हें एसआईआर के दायरे में लाया जाएगा। साथ ही, जिन मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जाएंगे, उनके अभिलेख भी सुरक्षित रखे जाएंगे। आगे किसी विवाद की स्थिति में प्रमाण उपलब्ध कराने के लिए यह व्यवस्था रहेगी।

विशेष गहन पुनरीक्षण के तहत बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) घर-घर जाएंगे। वे मतदाताओं को गणना-प्रपत्र वितरित करेंगे। उसे भरने में सहयोग करेंगे और एकत्रित करने के बाद मतदाताओं का सत्यापन कर जानकारी को बीएलओ ऐप पर अपलोड करेंगे। निर्वाचन आयोग की कोशिश है कि पंचायत और विधानसभा चुनाव से पहले अपडेट और सही मतदाता सूची उपलब्ध कराई जा सके।

 

हर पात्र नागरिक का नाम निर्वाचक नामावली में दर्ज होना सामूहिक जिम्मेदारी है। मतदाता सूची को न केवल त्रुटिरहित और पारदर्शी बनाया जाएगा, बल्कि समावेशी पंजीकरण सुनिश्चित करना भी लक्ष्य है। विशेष ध्यान 18–19 वर्ष की आयु वर्ग के युवाओं पर दिया जाना है, ताकि उन्हें पहली बार मतदाता सूची में शामिल किया जा सके।

- नवदीप रिणवा, मुख्य निर्वाचन अधिकारी

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