भक्तों के आस्था का केंद्र हैं शक्तिपीठ मां बाराही देवी मंदिर..प्रतिदिन श्रद्धालु पहुंचकर करते हैं माता का दर्शन पूजन 

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Published By Anjali Singh
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गोंडा, अमृत विचार: जिला मुख्यालय से करीब 40 किमी दूर उमरी बेगमगंज के मुकुंदपुर गांव स्थित माता वाराही देवी का मंदिर लाखों भक्तों के आस्था का केंद्र है। यहां प्रतिदिन श्रद्धालु पहुंचकर माता का दर्शन पूजन करते हैं। नवरात्रि के दिनों में मां के दर्शन के लिए यहां लाखों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं। नवरात्रि के दूसरे दिन मंगलवार को यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रही। श्रद्धालुओं ने नारियल ,चुनरी व धूप दीप के साथ माता का दर्शन पूजन कर सुख समृद्धि की कामना की।

जिला मुख्यालय से करीब 40 किमी दूर मां बाराही का यह मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक है। कहा जाता है कि जब भगवान शिव माता सती का पार्थिव शरीर को उठाकर ले जा रहे थे तब माता सती का जबड़ा इस स्थान पर गिरा था। जिस स्थान पर जबड़ा गिरा वहां सुरंग बन गयी। वह स्थान आज भी यहां विद्यमान है। यह सुरंग कितनी गहरी है इसका कोई पता नहीं लगा सका। माता वाराही का यह मंदिर लाखों भक्तों की आस्था का केंद्र है। प्रदेश के अलग अलग जिलों के श्रद्धालु यहां आते हैं और माता का दर्शन करते हैं। माता वाराही का यह मंदिर कई मायनों में खास माना जाता है। स्थानीय लोगों की माने तो इस मंदिर में आंख दान करने की परंपरा है। यहां पर कृत्रिम आंख लेकर श्रद्धालु मां के चरणों में अर्पित करते हैं। यहां लगे एक पुराने वटवृक्ष का दूध आंख में डालने से आंख की खराबी ठीक हो जाती है और आंख की ज्योति वापस आ जाती है। ऐसी मान्यता है कि जो भक्त सच्चे मन से यहां अपनी मनोकामना की पूर्ति के लिए प्रार्थना करते हैं मां वाराही उनकी मनोकामना जरूर पूरा करती हैं।

मंदिर में मौजूद श्रद्धालु राजू ने कहा कि उसकी आंख में धान की पत्ती लग जाने से वह खराब हो गयी थी। इलाज कराया लेकिन फायदा नहीं हो रहा था। फिर मंदिर आया तो पुजारी जी ने बरगद के पेड़ के पत्ते का दूध उनकी आंख में डालना शुरू किया। अब आंख लगभग ठीक हो चुकी है। वहीं महिला श्रद्धालु ने भी यहां का दूध डालने से आंख ठीक होने की बात कही। मां का दर्शन करने आई महिला श्रद्धालु ने कहा कि यहां आने वाले भक्तों की मनोकामना माता जरूर पूरा करती हैं। मंदिर की मुख्य पुजारी साध्वी रामा देवी का कहना है यह मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक है। यहां माता जी का जबड़ा गिरा था जो सीधा पाताल लोक चला गया था। वह सुरंग आज भी वर्तमान में विद्यमान है। इस स्थान पर अखंड ज्योति दिन रात जलती रहती है। जिसकी आंख चली गयी हो उसकी आंख की रोशनी यहां का जल और मंदिर परिसर में स्थित 2500 वर्ष पुराने वटवृक्ष का दूध लगाने से वापस आ जाती है।

शारदीय नवरात्रि: दूसरे दिन हुई मां ब्रह्मचारिणी की पूजा

शारदीय नवरात्रि के दूसरे दिन मंगलवार को माता के दूसरे स्वरूप मां ब्रह्मचारिणी की पूजा अर्चना की गयी।माता के पूजन के लिए जिले भर के देवी मंदिरों में भक्तों का तांता लगा रहा। श्रद्धालुओं ने शहर के काली भवानी और खैरा भवानी मंदिर समेत उनकी बेगमगंज स्थित मां वाराही देवी, मेहनौन स्थित माता पटमेश्वरी देवी व मनकापुर के बानगढ़ देवी मंदिर में पहुंचकर माथा टेका। नारियल चुनरी के साथ पुष्प, मिष्ठान व श्रंगार की सामग्री अर्पित कर मां कात्यायनी की पूजा अर्चना की और सुख समृद्धि का आशीर्वाद मांगा। उमरी बेगमगंज स्थित मां बाराही देवी के मंदिर में श्रद्धालुओं की हुजूम उमड़ पड़ा। हजारों की संख्या में लोगों ने मां बाराही के मंदिर में दर्शन पूजन किया और सुख समृद्धि की प्रार्थना की। संतोषी माता मंदिर व करनैलगंज के ज्वाला देवी मंदिर पर भी श्रद्धालुओं ने नारियल चुनरी के साथ मां का पूजन अर्चन किया और सुख सौभाग्य का आशीर्वाद मांगा।

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