पीलीभीत: महज पांच दिन चला कार्यकाल और 05 FIR...पहली रिपोर्ट के बाद ही हटा दिए गए थे विहिरप जिलाध्यक्ष

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
On

पीलीभीत, अमृत विचार। प्रधान पुत्र की ओर से न्यूरिया थाने में रंगदारी समेत अन्य धाराओं में दर्ज कराए गए मुकदमे को निरस्त कराने की मांग को लेकर टनकपुर हाईवे पर जाम लगाने के बाद गिरफ्तार कर विश्व हिंदू रक्षा परिषद के जिलाध्यक्ष यशवंत सिंह को जेल भेज दिया था। उन पर एक-एक कर कुल पांच मुकदमे दर्ज किए गए।

संगठन विरोधी गतिविधि पर संगठन से निष्कासित कर दिया गया है। ये कार्रवाई जेल जाने के बाद की मानी जा रही थी लेकिन संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारियों की ओर से जारी किए गए पत्र पर गौर करें तो पहली एफआईआर के बाद ही पद से हटाने की बात दशाई गई है। वहीं, अन्य पदाधिकारियों को लेकर भी संशय की स्थिति बनी हुई है। जेल जाते वक्त यशवंत सिंह ने अपने स्तर से कार्यकारिरणी का गठन न किए जाने की बात कही थी और राष्ट्रीय नेतृत्व भी सिर्फ जिलाध्यक्ष पद पर मनोनयन गत दिनों करने की बात कह रहा है। ऐसे में मामला चर्चा का विषय बना हुआ है।

बता दें कि विश्व हिंदू रक्षा परिषद के जिलाध्यक्ष पद पर यशंवत सिंह का मनोनयन नौ सितंबर को किया गया था। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष गोपाल राय की ओर से उनको मनोनयन पत्र सौंपा गया। इसके बाद 11 सितंबर को पीलीभीत आगमन पर रोड शो निकाल गया और कई जगह स्वागत किया गया। इस दौरान शहर में कई जगह मनोनयन पर बधाई से जुड़े फ्लैक्स आदि लगाए जा चुके थे।  जिसमें गोपाल शर्मा वरिष्ठ महामंत्री, आशीष लोधी जिला प्रभारी, गौरव राना कार्यवाहक जिलाध्यक्ष,शुभम सक्सेना जिला संगठन मंत्री, सूरज वर्मा के आगे जिला महामंत्री पद का जिक्र है। तेरह सितंबर को न्यूरिया थाने में पंडरी गांव निवासी प्रधान पुत्र कमल कुमार की ओर से यशवंत सिंह, गोपाल शर्मा, शैली उर्फ जौली गुप्ता, गौरव राना और अज्ञात पर रिपोर्ट दर्ज की गई। 

जिसमें गोशाला पहुंचकर कर्मचारियों से मारपीट, रंगदारी मांगने आदि के आरोप लगाए गए थे। इसी मुकदमे को निरस्त कराने की मांग करते हुए बीस सितंबर को टनकपुर हाईवे पर जाम लगाया गया था। इसके बाद ही जिलाध्यक्ष यशवंत की गिरफ्तारी कर जेल भेज दिया था। कुल पांच मुदकमे दर्ज हो गए थे।  अब पदमुक्त किए जाने के बाद कई सवाल उठ गए हैं। राष्ट्रीय सचिव रचना गौतम की ओर से डीएम -एसपी को भेजे गए यशवंत सिंह के निष्कासन की सूचना बीस  सितंबर को भेजी गई है। जिसमें 14 सितंबर को ही संगठन से निष्कासित करने की बात कही गई है। इसके अनुसार बीस सितंबर को जाम लगाया गया तब संगठन से हटाए जा चुके थे। 

पकड़े जाने के बाद यशवंत सिंह का कहना था कि उनके द्वारा अभी कार्यकारिणी गठित नहीं की गई थी। अध्यक्ष बनते ही विवादों में फंस गए। फ्लैक्स बगैरह लगाए जाने की भी उन्हें पहले से जानकारी नहीं थी। उधर, राष्ट्रीय अध्यक्ष गोपाल राय का कहना है कि उनके स्तर से सिर्फ जिलाध्यक्ष का मनोनयन किया गया था। इसके बाद जिलास्तरीय टीम का गठन यशवंत सिंह के स्तर से ही किया जाना था। ऐसे में अन्य पदों पर मनोनयन को लेकर संशय की स्थिति बनी है। वहीं फ्लैक्स में दिख रहे एक कथित पदाधिकारी ने भी इसका पूर्व में ही खंडन कर दिया। फिलहाल संगठन के जारी पत्र के अनुसार, मनोनयन और निष्कासन में महज पांच दिन का समय लगा। वहीं, टीम पर अलग-अलग मामलों में न्यूरिया और सदर कोतवाली में पांच मुकदमे भी दर्ज किए जा चुके हैं।

यशवंत सिंह और जौली गुप्ता ने ली सेशन कोर्ट की शरण
रंगदारी समेत अन्य आरोपों में न्यूरिया और कोतवाली में दर्ज दो मुकदमों में जमानत के लिए अब यशवंत सिंह की ओर से सेशन कोर्ट में जमानत प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया गया है। जिसमें जमानत की गुहार लगाई है। वहीं, न्यूरिया थाने में दर्ज मुकदमे के दूसरे आरोपी जौली गुप्ता ने भी बुधवार को सेशन कोर्ट में अपनी अग्रिम जमानत याचिका दायर की। यशवंत सिंह द्वारा दायर जमानत याचिकाओं में प्रभारी जिला जज ने कोतवाली में दर्ज रंगदारी के मुकदमे की जमानत याचिका पर सुनवाई के लिए 29 सितंबर और थाना न्यूरिया में दर्ज रंगदारी के मुकदमे की जमानत याचिका पर सुनवाई के लिए तीन अक्टूबर की तिथि नियत की। जौली गुप्ता की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई के लिए तीन अक्टूबर की तिथि नियत की गई है। बता दें कि आरोपी यशवंत सिंह के उक्त दोनों मुकदमों के जमानत आवेदन को अवर न्यायालय ने ख़ारिज कर दिया था।

संबंधित समाचार