जैन धर्मावलंबियों का प्रमुख तीर्थस्थल सोनागिरि
जैन धर्म के प्रमुख तीर्थस्थलों में से एक सोनागिरि सौ से अधिक भव्य जैन मंदिरों से सुशोभित है। यहां पर्यटक आध्यात्मिक शांति के साथ-साथ अद्भुत स्थापत्य कला और शांत वातावरण का अनुभव कर सकते हैं। मध्य प्रदेश के दतिया जिले में स्थित यह स्थल स्वर्ण पर्वत या गोल्डन पीक के नाम से प्रसिद्ध है। यह स्थान उन जैन धर्मावलंबियों के लिए के लिए एक अनूठा अनुभव प्रदान करता है जो शांतिपूर्ण वातावरण में आत्म-अनुशासन और मोक्ष प्राप्त करने की यात्रा करना चाहते हैं। यह हर दिन बड़े पैमाने पर श्रद्धालु आते हैं और दर्शन- पूजन करते हैं। जैन धर्म ही नहीं बल्कि हिंदू, सिख धर्म के लोग भी यहां भ्रमण करने के लिए आते हैं।
सोनागिरि भौगोलिक रूप से बहुत बड़ा गांव नहीं है, पर जैन धर्म के पवित्र तीर्थस्थल की वजह से यह भारत ही नहीं पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। पहाड़ी पर बने मंदिरों का विशाल समूह न सिर्फ आध्यात्मिक, बल्कि पर्यटन के नजरिए से भी लोगों के लिए काफी अहम है। जैन धर्म के प्रमुख तीर्थस्थलों में सोनागिरी मंदिर का नाम आता है।
चंद्रप्रभु प्रभु 17 बार यहां आए
सोनागिरी की मनोहारी पहाड़ी का प्राचीन नाम श्रवणगिरि या स्वर्णगिरि बताया जाता है। सोनागिरी पहाड़ी पर बने मंदिरों का निर्माणकाल नौवीं और दसवीं सदी का है। जैन धर्म के आठवें तीर्थंकर भगवान चंद्र प्रभु यहां 17 बार आए थे। जैन अनुयायियों के अनुसार राजा नग और अनंग कुमार इसी पहाड़ी पर जीवन और मृत्यु के चक्र से मुक्त हुए थे। उन्होंने यहां मोक्ष की प्राप्ति होने की वजह से ही जैन धर्म के संत और अनुयायी मोक्ष और निर्वाण की तलाश में यहां आते हैं। यहां पहाड़ी पर 43 फीट ऊंचा एक महास्तम्भ स्थापित है। यहां नंदीश्वर द्वीप जिनायल भी है। इसका निर्माण आचार्य ज्ञानसागर महाराज की प्रेरणा से किया गया था।
132 एकड़ में बने हैं मंदिर
सोनागिरी की प्राकृतिक छटा अद्भुत इसलिए दिखती है क्योंकि यहां जैन धर्म के भव्य मंदिरों की श्रृंखला है। यहां के मनोरम दृश्यों को देखने के बाद पर्यटक यहां घंटों नहीं बल्कि कई दिन तक रुकना चाहते हैं और यहां की वादियों को निहारना चाहते हैं। सुंदर मंदिरों का नजारा हर किसी का मन मोह लेता है। यहां स्थापित मंदिर 132 एकड़ क्षेत्रफल में फैले हुए हैं। यहां 57 नंबर वाले मंदिर को को ही मुख्य मंदिर माना जाता है। कहते हैं कि आचार्य शुभ चंद्र और भर्तृहरि ने यहां कठिन तपस्या की थी। इस मंदिर में आठवें तीर्थंकर भगवान चंद्र प्रभु की मूलनायक प्रतिमा है। यह प्रतिमा 17 फीट ऊंची है। गर्भ गृह की छत पर शीशे की बेहतरीन नक्काशी की गई है। यह नक्काशी जब लोग देखते हैं तो अपलक निहारते रह जाते हैं। सभा कक्ष में तीर्थंकरों के नाम दीवार पर अंकित हैं।
होली पर होता मेले का आयोजन
इस पवित्र तीर्थ स्थल पर पांच दिवसीय मेले का आयोजन किया जाता है। इस दौरान कई रथ यात्रायें निकाली जाती हैं। मंदिरों को सजाया जाता है। मेले में बड़ी संख्या में जैन धर्म के अनुयायी आते हैं। इस मंदिर के गर्भगृह में दो लेख देवनागरी लिपि में अंकित हैं। एक शिलालेख पर 1233 विक्रमी संवत अंकित है। सोनागिरी पहाड़ी की तलहटी में स्थित गांव भी मंदिर बने हुए हैं। मंदिरों के आसपास भी कई सुंदर कलाकृतियां हैं, जो आपका मन मोह लेंगी। पहाड़ी पर बने सभी मंदिर बहुत ही मनोरम हैं।-लेखक- संजीव जैन, उद्यमी हैं एवं विभिन्न धार्मिक और सामाजिक संस्थाओं के पदाधिकारी हैं।
