अखिलेश और आजम की मुलाकात से सधेगी पश्चिम उप्र. की राजनीति, मुस्लिम वोट बैंक मजबूत करने में जुटी सपा
लखनऊ, अमृत विचार। बरेली में बीते दिनों उपजे विवाद के बाद सपा प्रमुख अखिलेश यादव और आजम खां की 8 अक्टूबर बुधवार को होने वाली मुलाकात राजनीतिक रूप से बेहद अहम मानी जा रही है। सपा प्रमुख पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार बुधवार को वाया बरेली रामपुर जाएंगे। इस मुलाकात से सपा प्रमुख मुस्लिम वोट बैंक को साधने और पार्टी में पीडीए (पिछड़ा, दलित व अल्पसंख्यक) एकता का संदेश देने की कोशिश करेंगे।
रामपुर सपा प्रमुख गढ़ों में एक रहा है। वहां आजम खां लंबे समय से अगुवाई कर रहे थे।हाल के वर्षों में उनकी सक्रिय राजनीति से दूरी और समर्थकों की नाराज़गी ने सपा में नई चुनौतियां पैदा कर दी हैं। दूसरी ओर बरेली में 26 सितंबर को मुस्लिम समाज के प्रदर्शन पर पुलिस के लाठी चार्ज से सपा की छवि को नुकसान पहुंच रहा है। हालांकि, सपा का प्रतिनिधिमंडल बरेली जाने वाला था, लेकिन पुलिस ने उसके नेताओं को हाऊस अरेस्ट लिया था। ऐसे में अखिलेश का ये दौरा न केवल व्यक्तिगत संबंधों को मजबूत करने का प्रयास, बल्कि संगठनात्मक मजबूती का हिस्सा भी माना जा रहा है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि अखिलेश और आजम की मुलाकात के दौरान पार्टी की रणनीति, भविष्य में आजम की सक्रियता और 2027 के विधानसभा चुनावों पर चर्चा हो सकती है। साथ ही, मुस्लिम समाज में विश्वास मजबूत करने की रूपरेखा भी तैयार की जाएगी। यह मुलाकात सपा के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि आजम का प्रभाव पश्चिमी उप्र. के कई इलाकों में अब भी कायम है।
इसके अलावा सपा के भीतर पुराने कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने और भाजपा के बढ़ते प्रभाव को चुनौती देने की दिशा में एक बड़ा कदम है। रामपुर में आजम की मौजूदगी और सपा के प्रति उनका विश्वास पार्टी के लिए विशेष महत्व है। दूसरी तरफ अखिलेश के दौरे को लेकर सपा कार्यकर्ताओं में जोश और उम्मीद दोनों दिखाई दे रहे हैं कि यह मुलाकात पार्टी में नई ऊर्जा का संचार करेगी ।
