प्रभु श्रीराम के बाल्यकाल की कहानियां सुनाता अयोध्या का दशरथ महल
धार्मिक दृष्टिकोण से विश्व में भारत राम के देश के नाम से जाना जाता है, क्योंकि यहां राम की जन्मस्थली अयोध्या है। यह दुनियाभर के हिंदू धर्मावलंबियों के आस्था का केंद्र है। यहां भगवान राम से जुड़े और भी स्थल हैं, जो भगवान राम से जुड़े हैं और वे उनके बचपन की कहानियां सुनाते हैं। इसी में एक दशरथ महल है, जहां के बारे में कहा जाता है कि बाल्यावस्था में राम यहीं पैजनिया पहनकर ठुमकते हुए चलते थे। रामायण में भी इसका वर्णन है “ठुमक चलत रामचंद्र पहने पैजनिया”।
2021 में हुआ दशरथ महल का जीर्णोद्धार
अयोध्या में चूंकि सभी मंदिर और मसलें जीर्ण-क्षीर्ण थे, दशरथ महल भी खस्ताहाल था। जब भव्य राम मंदिर के निर्माण की बारी आई तभी 2021 में दशरथ महल का भी पुनरोद्धार हुआ। हालांकि वर्ष 2013 में अखिलेश सरकार ने भी इसके जीर्णोद्धार के लिए 2.04 करोड़ का बजट जारी किया था, लेकिन किन्हीं कारणों से दशरथ महल के जीर्णोद्धार का कार्य प्रारंभ नहीं हो सका और वह बजट धरा का धरा गया। शायद उस वक्त की सरकार व उच्च प्रशासन में ‘राम काज कीजै बिना मोहे कहां विश्राम’ जैसी इच्छा शक्ति का अभाव था।
सभी धार्मिक ग्रंथों में है दशरथ महल का वर्णन
दशरथ महल के महात्म्य का वर्णन राम से जुड़े सभी ग्रंथों में है। चाहे वाल्मीकि रामायण हो, महान कवि तुलसीदास कृत रामचरित मानस हो या रामानंद सागर कृत रामायण टीवी सीरियल ही क्यों न हो, रामलला के बाल्यकाल के सुलभ हठ, किलकारियां, हंसने-मुसकुराने, रोने-मनाने की लीलाओं का संबंध जिस दशरथ महल के प्रांगण से था इसका उल्लेख सबमें है। यह त्रेतायुग से लेकर आज तक भी यथावत है। भव्य मंदिर में बालस्वरूप रामलला के विराजते ही दशरथ महल का यह प्रांगण भी भाव विह्वल हो उठा।
जब चांद के लिए हठ करने लगे प्रभु राम
वह दशरथ महल ही है, जहां माता कौशल्या की गोद में पैजनिया पहने ठुमक कर चलते सकल ब्रह्मांड के नायक भगवान राम अपने पिता राजा दशरथ से चांद पाने का हठ कर लेते हैं और राजा दशरथ थाली में जल भरकर रामलला को चंद्रमा के प्रतिबिंब को पकड़ लेने को प्रेरित करते हैं। बाल्य अवस्था के राम चंद्रमा को पकड़ने के लिए थाली भरे पानी में छपकोइया खेलते रहते हैं। भगवान राम के बाल्यअवस्था का यह दृश्य हर किसी को मोहित करता है। यह वही दशरथ महल है, जो 500 साल के पराभव काल के दौरान भी मौजूदा रामजन्म भूमि क्षेत्र पर श्रीराम के मंदिर होने के साक्ष्यों की गवाही देता रहा।
योगी सरकार ने यहां उपलब्ध कराई तमाम सुविधाएं
योगी सरकार ने दशरथ महल के जीर्णोद्धार व सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण की प्रक्रिया को अमली जामा पहनाते हुए करीब तीन करोड़ रुपये खर्च कर यहां सत्संग भवन, प्रवेश द्वार, रैन बसेरा व दर्शनार्थी सहायता केंद्र के निर्माण- पुनरोद्धार व सुदृढ़ीकरण कर इसकी ऐतिहासिक खूबसूरती को बहाल कर दिया है। यहां निर्मित 650 स्क्वायर मीटर में बने सत्संग भवन में लगभग 300 से 350 सत्संगी एक साथ कीर्तन-भजन कर सकेंगे। दशरथ भवन की तरफ श्रद्धालुओं को भौतिक रूप से आकर्षित करने के लिए जगमगाती लाइटिंग सभी को अपनी ओर आकर्षित करती है। यहां श्रीराम के जीवन को चित्रित करते हुए वाल पेंटिंग, रामचरित मानस के दोहे लिखे हैं।
दशरथ महल का भव्य प्रवेश द्वार अपने पुराने वैभव को संरक्षित करते हुए यह आधुनिकता की चासनी से भी लैश है। खंभों और दीवारों पर लंबे समयावधि तक टिकाऊ रहने वाले पेंट-कोटिंग की परत चढ़ाई गई है। यहां आने वाले श्रद्धालुओं को कोई असुविधा न हो इसके लिए विशेष दर्शनार्थी सहायता केंद्र भी स्थापित है, जो यहां की समृद्ध विरासत, ऐतिहासिक महत्व, सांस्कृतिक योगदान व आध्यात्मिक महत्व के बारे में अवगत कराता है।-यशोदा श्रीवास्तव
