कानपुर : जीएसवीएसएस पीजीआई में एआई आधारित सिस्टम से सेफ हुई न्यूरो व स्पाइन सर्जरी
न्यूरो नेविगेशन सिस्टम से 90 मरीजों की हुई 99 फीसदी सफल सर्जरी
कानपुर, अमृत विचार। जीएसवीएसएस पीजीआई में एआई आधारित नेविगेशन सिस्टम स्थापित किया गया है, जिसकी मदद से न्यूरो संबंधित बीमारी या ट्यूमर ग्रस्त मरीजों को इलाज में काफी लाभ मिल रहा है। खास बात ये है कि इसकी मदद से मरीजों को अधिक जटिलता का सामना नहीं करना पड़ रहा है और सफलता की संभावना 99 फीसदी मिल रही है।
वहीं, न्यूरो के साथ ही स्पाइन की सर्जरी में भी इस सिस्टम की मदद से मरीजों का सटीक इलाज संभव हो रहा है। जीएसवीएसएस पीजीआई के न्यूरो और स्पाइन की ओपीडी में प्रतिदिन तीन सौ से अधिक मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं, जिसमे से कई मरीज सड़क हादसे में घायल, जेनेटिक कारण, ट्यूमर और अन्य वजह से न्यूरो व स्पाइन की समस्या से ग्रस्त होते हैं। न्यूरो और स्पाइन के मरीजों में सर्जरी करना डॉक्टरों के लिए भी काफी चुनौतीपूर्ण होता है।
सर्जरी के दौरान न्यूरो व स्पाइन के मरीजों में किसी भी प्रकार की गलती की कोई गुंजाइश न हो सके, इसलिए पीजीआई में न्यूरो नेविगेशन सिस्टम स्थापित कर उसको इंस्टॉल किया गया है। इस सिस्टम के जरिए अब तक 90 मरीजों की सफल सर्जरी हो चुकी है, जिसमे मरीजों व डॉक्टरों को 99 फीसदी सफलता हाथ लगी है। इसका मतलब ये है कि गलती की गुंजाइंश न के बराबर रह गई है।
पीजीआई के नोडल अधिकारी डॉ.मनीष सिंह ने बताया कि अभी तक न्यूरो की सर्जरी सिर को खोलकर की जाती थी, जिसमे काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ता था और सिर को दोबारा से बंद करने में पूरे में टांके लगाए जाते थे, लेकिन एआई आधारित न्यूरो नेवीगेशन सिस्टम से मरीज में जोखिम की संभावना काफी कम रह गई है। छोटे से छेद के जरिए यह सर्जरी संभव है। वहीं, सिस्टम से जिस नस में दिक्कत है, उसी को ही दुरस्त किया जा सकता है। वहीं, ऑपरेशन के बाद 90 मरीजों में लकवा आदि की भी दिक्कत नहीं देखी गई।
इन प्रक्रिया से गुजरने के बाद होती सर्जरी
डॉ.मनीष सिंह ने बताया कि ब्रेन ट्यूमर या किसी अन्य समस्या वाले मरीज की एमआरआई या सीटी स्कैन की इमेज को न्यूरो नेविगेशन सिस्टम पर अपलोड किया जाता है। सर्जन फिर सर्जरी की योजना बनाता है और मरीज के मस्तिष्क की मैपिंग करके उसे सिस्टम में फिक्स कर देता है।
सर्जरी के दौरान न्यूरो नेविगेशन सिस्टम ट्यूमर या संबंधित नस में समस्या को चिन्हित करता है और सर्जन को सबसे कम दूरी से ट्यूमर तक पहुंचने में मदद करता है। यह सिस्टम छोटे चीरे से सर्जरी करने में मदद करता है, जिससे हाथ व पैरों में कमजोरी आने की संभावना कम हो जाती है।
