गीता : जीवन का प्रकाशपुंज
कुरुक्षेत्र के मैदान में अर्जुन मोहग्रस्त थे और सत्य की रक्षा के लिए अपने बंधु-बांधवों से युद्ध करने में हिचक रहे थे। उस समय भगवान श्रीकृष्ण ने अपने परम मित्र भक्त अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था। गीता के रूप में स्वयं भगवान श्रीकृष्ण के मुख से निकले उपदेश किसी जाति, धर्म और संप्रदाय की सीमा से आबद्ध नहीं हैं, बल्कि यह संपूर्ण मानव जाति के कल्याण का मार्ग हैं। पाश्चात्य जगत में विश्व साहित्य का कोई भी ग्रंथ इतना अधिक उद्धरित नहीं हुआ है, जितना कि भगवद्गीता।
कुरुक्षेत्र के मैदान में अर्जुन मोहग्रस्त थे और सत्य की रक्षा के लिए अपने बंधु-बांधवों से युद्ध करने में हिचक रहे थे। उस समय भगवान श्रीकृष्ण ने अपने परम मित्र भक्त अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था। गीता के रूप में स्वयं भगवान श्रीकृष्ण के मुख से निकले उपदेश किसी जाति, धर्म और संप्रदाय की सीमा से आबद्ध नहीं हैं, बल्कि यह संपूर्ण मानव जाति के कल्याण का मार्ग हैं। पाश्चात्य जगत में विश्व साहित्य का कोई भी ग्रंथ इतना अधिक उद्धरित नहीं हुआ है, जितना कि भगवद्गीता।
