Ayodhya News: महिला अस्पताल में आ रहा मुनाफा, पुरुष संचालन करने में हाफा... कुछ ऐसा है District Hospital का हाल
अयोध्या, अमृत विचार: शहर के स्वास्थ्य सेवाओं में एक असमानता नजर आ रही है। जिला महिला चिकित्सालय अपने प्राइवेट वार्डों से अच्छा खासा राजस्व कमा रहा है। वहीं बगल का जिला पुरुष चिकित्सालय अपने प्राइवेट वार्डों अभी तक संचालित नहीं कर पाया है। पुरुष अस्पताल में पांच प्राइवेट वार्ड तैयार किए गए हैं, लेकिन डेढ़ साल से अधिक समय बीत जाने के बावजूद इन पर ताला लटका हुआ है। आलम यह है कि संचालन की कोई ठोस तारीख नहीं आ पाई है।
दूसरी ओर महिला अस्पताल के प्राइवेट वार्ड प्रसूताओं की की पहली पसंद बन चुके हैं। जिससे अस्पताल को हर महीने हजारों रुपये का लाभ हो रहा है। अकेले सितंबर माह में ही 76,006 रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ, जबकि पुरुष अस्पताल की ओर से कोई कमाई नहीं हो रही। जिला महिला चिकित्सालय में प्राइवेट वार्ड की राजस्व बढ़ाने का स्रोत बना हुआ है। अस्पताल परिसर में सात कमरे प्राइवेट वार्ड के लिए आरक्षित हैं। जिनमें चार एसी और तीन नॉन एसी हैं। इन कमरों की दरें किफायती रखी गई हैं। एसी कमरे का दैनिक चार्ज प्रतिदिन 250 रुपये है, जबकि नॉन-एसी कमरे के लिए 125 रुपये प्रतिदिन देने पड़ते हैं। डिलीवरी के मामले में अतिरिक्त शुल्क लागू होता है। सीजेरियन ऑपरेशन पर 800 रुपये और नॉर्मल डिलीवरी पर 500 रुपये एकमुश्त लिए जाते हैं।
कम बजट में होती है बेहतर देखभाल
महिला अस्पताल की मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. विभा कुमारी ने बताया कि हम प्राइवेट वार्ड में मरीजों को मिलने वाली चिकित्सीय सुविधाओं में लगातार सुधार करते रहते हैं। सितंबर 2023 में प्राइवेट वार्ड से 76,007 रुपये की कमाई हुई। इससे पहले अगस्त में 45,252 रुपये, जुलाई में 13,510 रुपये और जून में 23,832 रुपये राजस्व प्राप्त हुआ था। जून से सितंबर तक कुल मिलाकर लगभग 1.58 लाख रुपये से अधिक की कमाई हो चुकी है। यह राशि अस्पताल के रखरखाव, दवाओं की खरीद और अन्य सुविधाओं पर खर्च की जाती है। प्रसूताओं की बढ़ती संख्या के पीछे कारण स्पष्ट हैं साफ-सुथरे कमरे, प्रशिक्षित स्टाफ, 24 घंटे डॉक्टरों की उपलब्धता है। कई महिलाएं बताती हैं कि निजी अस्पतालों में लाखों रुपये खर्च करने की बजाय यहां कम खर्च में बेहतर देखभाल मिलती है।
स्टाफ की कमी व चार्ज नहीं है फिक्स
जिला पुरुष चिकित्सालय की तस्वीर पूरी तरह उलट है। अस्पताल में पांच प्राइवेट वार्ड बनाए गए हैं, जो पूरी तरह तैयार हैं। बेड, फर्नीचर व अन्य सुविधाएं मौजूद हैं, लेकिन इनका संचालन शुरू नहीं हो पाया है। लगभग सवा साल से अधिक समय से यह प्रक्रिया लंबित है। हर बार बैठक होती हैं। प्रस्ताव पास होते हैं, लेकिन क्रियान्वयन नहीं होता। अधिकारियों का कहना है कि स्टाफ की कमी, बजट की समस्या या प्रशासनिक अनुमति का इंतजार है। जिला चिकित्सालय के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अजय चौधरी बताते हैं कि अभी हमारी तरफ से बार फिर से प्राइवेट वार्ड चालू करने के लिए शासन से इजाजत मांगी गई है। दरअसल हमारे यहां अभी चार्ज फिक्स नहीं हो पाया है। साथ ही स्टाफ की भी कमी है। इस कारण संचालन में परेशानी आ रही है।
